भारत के विभिन्न राज्यों में माओवादियों के खिलाफ सुरक्षाबलों का अभियान लगातार जारी है। महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ और झारखंड आदि राज्यों में मुठभेड़ में लगातार माओवादी मारे जा रहे हैं। इसी क्रम में झारखंड के गुमला जिले में बुधवार को सुबह-सुबह सुरक्षाबलों कम से कम तीन माओवादियों को मार गिराया है। आइए जानते हैं इस मुठभेड़ के बारे में विस्तार से।
कब हुई मुठभेड़?
पुलिस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, झारखंड के गुमला जिले में बुधवार सुबह सुरक्षाबलों और एक प्रतिबंधित माओवादी समूह के बीच मुठभेड़ हुई। इस मुठभेड़ में कम से कम तीन सदस्य मारे गए हैं। ये मुठभेड़ सुबह 8 बजे बिष्णुपुर थाना क्षेत्र के तहत आने वाले जंगल में झारखंड जगुआर, गुमला पुलिस और सुरक्षाबलों और झारखंड जन मुक्ति परिषद (जेजेएमपी) के माओवादियों के बीच हुई है।
तलाशी अभियान जारी
पुलिस की ओर से बताया गया है कि गुमला में सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच मुठभेड़ में जेजेएमपी संगठन के 3 माओवादी मारे गए हैं। मुठभेड़ वाले स्थल से तीन हथियार भी बरामद किए गए हैं। सुरक्षाबलों द्वारा अभी इलाके में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ में केंद्रीय समिति के सदस्य ढेर
इससे पहले सोमवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में हुई मुठभेड़ में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के दो वरिष्ठ माओवादी नेता मारे गए थे। मारे गए माओवादियों की पहचान राजू दादा उर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी (63) और कोसा दादा उर्फ कदारी सत्यनारायण रेड्डी (67) के रूप में की गई है। दोनों प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति के सदस्य थे और प्रत्येक पर 1.80 करोड़ रुपये का इनाम था।
जानकारी के मुताबिक, दोनों मारे गए दोनों माओवादी अनेक हिंसक घटनाओं के मास्टरमाइंड रहे हैं। इन घटनाओं में कई जवान शहीद हुए थे और निर्दोष नागरिकों की जान गई थी। इस कामयाबी पर आईजी बस्तर सुंदरराज ने कहा है कि हाल के दिनों में प्रतिबंधित संगठन को गंभीर क्षति हुई है, जिससे संगठन खंडित, नेतृत्वविहीन और दिशाहीन हो गया है। (इनपुट: भाषा)
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