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Chaitra Navratri 2019, Kushmanda: नवरात्र के चौथे दिन मां कुष्मांडा की इस विधि से करें पूजा साथ ही जानें मंत्र

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Apr 08, 2019 06:49 pm IST,  Updated : Apr 08, 2019 06:49 pm IST

आज नवरात्र का चौथा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्माण्डा की उपासना की जायेगी। साथ ही आज वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। देवी कुष्मांडा आदिशक्ति का चौथा स्वरूप हैं। जानें मां कुष्मांडा की पूजा विधि और मंत्रों के बारें में।

Kushmanda- India TV Hindi
Kushmanda

Chaitra Navratri 2019: आज चैत्र शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि और मंगलवार का दिन है। आज नवरात्र का चौथा दिन है। आज के दिन मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कुष्माण्डा की उपासना की जायेगी। साथ ही आज वैनायकी श्री गणेश चतुर्थी व्रत भी है। देवी कुष्मांडा आदिशक्ति का चौथा स्वरूप हैं। जानें मां कुष्मांडा की पूजा विधि और मंत्रों के बारें में।

कौन है मां कुष्मांडा?

माता को कुम्हड़े की बलि बहुत प्रिय है। मां कुष्माण्डा की आठ भुजायें होने के कारण इन्हें अष्टभुजा वाली भी कहा जाता है। इनके सात हाथों में क्रमशः कमण्डल, धनुष, बाण, कमल, अमृत से भरा कलश, चक्र तथा गदा नजर आता है, जबकि आठवें हाथ में जप की माला रहती है। माता का वाहन सिंह है और इनका निवास स्थान सूर्यमंडल के भीतर माना जाता है। कहते हैं सूर्यलोक में निवास करने की क्षमता अगर किसी में है तो वह केवल मां कुष्माण्डा में ही है। साथ ही माना जाता है कि देवी कुष्माण्डासूर्य देव को दिशा और ऊर्जा प्रदान करती हैं। (Chaitra Navratri 2019: मां कुष्मांडा की पूर्ण आरती)

परिवार में खुशहाली के लिए, अच्छे स्वास्थ्य के लिये और यश, बल तथा आयु की वृद्धि के लिये आज के दिन मां कुष्माण्डा का ध्यान करके उनके इस मंत्र का जाप करना चाहिए-'ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडायै नम:' ..

ऐसे करें पूजा
दुर्गा पूजा के चौथे दिन माता कुष्मांडा की पूजा सच्चे मन से करना चाहिए। फिर मन को अनहत चक्र में स्थापित करने हेतु मां का आशीर्वाद लेना चाहिए। सबसे पहले सभी कलश में विराजमान देवी-देवता की पूजा करें फिर मां कुष्मांडा की पूजा करें। इसके बाद हाथों में फूल लेकर मां को प्रणाम कर इस मंत्र का ध्यान करें। (Chaitra Navratri 2019: नवरात्र में इस कारण 13 अप्रैल को पड़ रही है रामनवमी)

सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च. दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु।

फिर मां कुष्मांडा के इस मंत्र का जाप करें।
या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

मां की पूजा के बाद महादेव और परमपिता ब्रह्मा जी की पूजा करनी चाहिए। इसके बाद मां लक्ष्मी और विष्णु भगवान की पूजा करें।

ध्यान
वन्दे वांछित कामर्थे चन्द्रार्घकृत शेखराम्।
सिंहरूढ़ा अष्टभुजा कूष्माण्डा यशस्वनीम्॥
भास्वर भानु निभां अनाहत स्थितां चतुर्थ दुर्गा त्रिनेत्राम्।
कमण्डलु, चाप, बाण, पदमसुधाकलश, चक्र, गदा, जपवटीधराम्॥
पटाम्बर परिधानां कमनीयां मृदुहास्या नानालंकार भूषिताम्।
मंजीर, हार, केयूर, किंकिणि रत्नकुण्डल, मण्डिताम्॥
प्रफुल्ल वदनांचारू चिबुकां कांत कपोलां तुंग कुचाम्।
कोमलांगी स्मेरमुखी श्रीकंटि निम्ननाभि नितम्बनीम्॥

स्तोत्र पाठ
दुर्गतिनाशिनी त्वंहि दरिद्रादि विनाशनीम्।
जयंदा धनदा कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
जगतमाता जगतकत्री जगदाधार रूपणीम्।
चराचरेश्वरी कूष्माण्डे प्रणमाम्यहम्॥
त्रैलोक्यसुन्दरी त्वंहिदुःख शोक निवारिणीम्।
परमानन्दमयी, कूष्माण्डे प्रणमाभ्यहम्॥

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