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अगर मनुष्य का ये गुण जरूरत से ज्यादा हो जाए हावी तो वो बन जाता है कायर

 Written By: India TV Lifestyle Desk
 Published : Mar 11, 2021 06:15 am IST,  Updated : Mar 11, 2021 06:15 am IST

खुशहाल जिंदगी के लिए आचार्य चाणक्य ने कई नीतियां बताई हैं। अगर आप भी अपनी जिंदगी में सुख और शांति चाहते हैं तो चाणक्य के इन सुविचारों को अपने जीवन में जरूर उतारिए।

Chanakya Niti-चाणक्य नीति- India TV Hindi
Chanakya Niti-चाणक्य नीति Image Source : INDIA TV

आचार्य चाणक्य की नीतियां और विचार भले ही आपको थोड़े कठोर लगे लेकिन ये कठोरता ही जीवन की सच्चाई है। हम लोग भागदौड़ भरी जिंदगी में इन विचारों को भले ही नजरअंदाज कर दें लेकिन ये वचन जीवन की हर कसौटी पर आपकी मदद करेंगे। आचार्य चाणक्य के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज का ये विचार धैर्य पर आधारित है।

'धैर्य की अपनी सीमाएं हैं अगर ज्यादा हो जाए तो कायरता कहलाती है।' आचार्य चाणक्य

आचार्य चाणक्य के इस कथन का अर्थ है कि हर एक चीज की सीमा होती है। फिर चाहे वो धैर्य ही क्यों ना हो। अगर आप जरूरत से ज्यादा किसी चीज में धैर्य दिखाएंगे तो वो कायरता कहलाती है। 

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असल जिंदगी में आपका सामना कई तरह के लोगों से होगा। बहुत सारे लोग आपसे अच्छे से बात करेंगे और बहुत से नहीं। ऐसे में आपको ये देखना होगा कि कोई आपसे ऐसी बात ना कह दे जो आपके आत्म सम्मान को चोट पहुंचा दे। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार मनुष्य का धैर्य उसकी कायरता की निशानी कहलाता है। हमेशा इस बात का मनुष्य को ध्यान रखना चाहिए कि जब बात अपने स्वाभिमान पर आए तो बिल्कुल भी धैर्य ना दिखाए।

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इसके अलावा जब बात आपके प्रियजन की हो तो भी कई बार आपका धैर्य दिखाना आपको गलत ही साबित करेगा। कई बार ऐसा होता है कि जब आपके अपनों को आपकी जरूरत होती है। उस समय आपका बोलना जरूरी होता है लेकिन उस वक्त आप सिर्फ इस वजह से चुप रह जाते हैं क्योंकि वो आपको बहुत ज्यादा नहीं लगता। या फिर आपकी सहनशीलता इतनी ज्यादा होती है कि आप उसे आसानी से बर्दाश्त कर जाते हैं। अगर आप परिस्थिति के अनुसार रिएक्ट नहीं कर रहे तो आपके धैर्य को लोग गलत समझकर उसे कायरता का नाम दे देते हैं। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि धैर्य की अपनी सीमाए हैं अगर ज्यादा हो जाए तो कायरता कहलाती है। 

 

 

 

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