मध्यप्रदेश के भिंड जिले में करोड़ों के MSP घोटाले के बाद अब किसानों के नाम पर फर्जी ऋण निकालने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। लगभग छह साल की लंबी जांच के बाद आखिरकार भिंड के जिला सहकारी बैंक की मेहगांव शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक, कैशियर और दो समिति प्रबंधकों सहित चार लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और अन्य धाराओं में मेहगांव थाना में एफआईआर दर्ज कराई गई है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आरोपियों में शामिल एक समिति प्रबंधक की मौत हो चुकी है।
क्या है मामला?
दरअसल वर्ष 2012 से जनवरी 2019 के बीच मेहगांव थाना क्षेत्र में स्थित रायपुरा सहकारी समिति के सदस्य 20 किसानों के नाम पर लाखों का लोन स्वीकृत किया गया था। खाद-बीज उपलब्ध कराने के लिए 6 लाख 63 हजार रुपये का लोन स्वीकृत किया गया। लेकिन ऋण लेने के लिए किसानों के असली दस्तावेजों की जगह फर्जी कागजात तैयार किए गए और फिर किसानों के फर्जी हस्ताक्षर करके ऋण स्वीकृत करा लिया गया। जबकि जिन किसानों के नाम पर लोन स्वीकृत किया गया था उन्हें इसकी भनक तक नहीं लगी।
मामला सामने आते ही मची खलबली
जैसे ही ये मामला सामने आया खलबली मच गई। मामला सामने आने के बाद जांच शुरू हुई और खुलासा हुआ कि मंजूर किए गए लोन की राशि किसानों के खातों में पहुंचाने के बजाय संबंधित कर्मचारियों ने अपने खातों में ट्रांसफर कर ली और लोन की पूरी राशि हड़प ली। मामला खुलने के बाद जिला सहकारी बैंक ने इसकी विस्तृत जांच कराई। जांच प्रतिवेदन में बड़े पैमाने पर दस्तावेजों में फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। जांच में तत्कालीन शाखा प्रबंधक के.एम. मौर्य, कैशियर हरिओम, तत्कालीन समिति प्रबंधक राय सिंह जादौन और अरविंद सिंह जादौन की इस पूरे मामले में मुख्य रूप से संलिप्तता सामने आई है, जिनमें से राय सिंह जादौन का निधन हो चुका है।
अन्य की भूमिका की आशंका
जांच रिपोर्ट के अनुसार इस फर्जीवाड़े में कुछ अन्य अज्ञात लोगों की भूमिका हो सकती है। जांच के आधार पर वर्तमान रायपुरा समिति प्रबंधक लाल सिंह गोयल द्वारा मेहगांव थाने में शिकायत दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मेहगांव एसडीओपी संजय कोच्छा ने बताया कि मामले की गहन विवेचना की जा रही है। जांच के दौरान बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेज और लेन-देन की पड़ताल की जाएगी। जांच के बाद इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं और आरोपियों की संख्या बढ़ सकती है। भिण्ड जिले में पहले MSP घोटाले का खुलासा और अब किसान ऋण घोटाले ने सहकारी संस्थाओं की साख एवं कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अगर गहराई से जांच की जाए तो ऐसे कई मामले सामने आ सकते हैं।
(रिपोर्ट- परानिधेश भारद्वाज)
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