1. Hindi News
  2. मध्य-प्रदेश
  3. चार बेटों ने नहीं दी मां को मुखाग्नि, समाजसेवी संस्था ने निभाया अंतिम संस्कार का फर्ज, वृद्धाश्रम में 8 महीने हुई थी देखभाल

चार बेटों ने नहीं दी मां को मुखाग्नि, समाजसेवी संस्था ने निभाया अंतिम संस्कार का फर्ज, वृद्धाश्रम में 8 महीने हुई थी देखभाल

 Written By: India TV MP Bureau Desk
 Published : Sep 17, 2026 02:01 pm IST,  Updated : Sep 17, 2026 02:13 pm IST

चार बेटों के होने के बावजूद मां का अंतिम संस्कार एक समाजसेवी संस्था ने किया। इस बेसहारा महिला की 8 महीने इंदौर के वृद्धाश्रम में देखभाल हुई थी।

समाजसेवी संस्था ने बेसहारा मां को दी मुखाग्नि- India TV Hindi
समाजसेवी संस्था ने बेसहारा मां को दी मुखाग्नि Image Source : STRINGER INPUT

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है। खबर ऐसी है कि जिस मां ने अपने बच्चों को पालने के लिए पूरी जिंदगी खपा दी, उसी मां की अंतिम यात्रा में जब चारों बेटों का साथ नहीं मिला तो इंसानियत का एक अलग और हैरान करने वाला चेहरा सामने आया। इंदौर में लता बाई की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी परिवार ने नहीं, बल्कि एक समाजसेवी संस्था ने निभाई। मां को मुखाग्नि देने के लिए बेटे नहीं पहुंचे, लेकिन जिन लोगों ने उनके जीवन के आखिरी आठ महीने संभाले। वही उनकी अंतिम विदाई के साथी बने। इससे पहले भी ऐसी खबर सामने आई थी, जब तीन बेटियों ने ऑनलाइन 5100 रुपये भेजकर पिता का अंतिम संस्कार कराया था।

मां को धोखा देकर किया बाहर

बताया जा रहा है कि सिलिकॉन सिटी की गणेश रेसिडेंसी में रहने वाली लता बाई ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी और जेवर बेचकर एक फ्लैट खरीदा था। संस्था से जुड़े लोगों के अनुसार बाद में उनके एक बेटे ने वह फ्लैट अपने नाम करवा लिया और लता बाई को घर से बाहर कर दिया। इसके बाद उम्र के उस पड़ाव में, जब उन्हें अपने बच्चों के सहारे की सबसे ज्यादा जरूरत थी। उन्हें बेहद मुश्किल परिस्थितियों से गुजरना पड़ा।

समाजसेवी संस्था ने बेसहारा महिला का किया अंतिम संस्कार

लता बाई की स्थिति की जानकारी, जब प्रीयु फाउंडेशन के अजय नागदा को मिली तो उन्होंने उनकी मदद के लिए पहल की। मेडिकल जांच के बाद लता बाई को जानकी वृद्धाश्रम में आश्रय दिया गया। करीब आठ महीने तक वृद्धाश्रम में उनकी देखभाल होती रही। इस दौरान संस्था के लोग ही उनके लिए परिवार की तरह खड़े रहे। अचानक तबीयत बिगड़ने पर लता बाई को एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनका निधन हो गया। उनकी मौत की सूचना ॐ शांति आश्रम की ब्रह्मकुमारी ज्योति दीदी के माध्यम से बेटों तक पहुंचाई गई। संस्था का कहना है कि सूचना देने के बावजूद चारों बेटे अंतिम संस्कार में शामिल नहीं हुए और मां को मुखाग्नि देने से भी इनकार कर दिया।

मां को आखिरी सफर में नहीं मिला बच्चों का साथ

इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने पर प्रीयु फाउंडेशन और जानकी वृद्धाश्रम ने लता बाई की अंतिम विदाई का जिम्मा उठाया। रीजनल पार्क में पूरे सम्मान और विधि-विधान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। जिंदगी भर बच्चों के लिए जीने वाली मां को आखिरी सफर में भले ही अपनों का कंधा नहीं मिला, लेकिन समाजसेवियों ने उन्हें अकेला नहीं छोड़ा। लता बाई की कहानी एक ऐसा सवाल छोड़ गई है, जिसका जवाब शायद हर परिवार को अपने भीतर तलाशना होगा- रिश्ते सिर्फ खून से बनते हैं या उन्हें निभाना भी पड़ता है?

(इनपुट - भरत पाटिल)

ये भी पढ़ें - पिता की मौत के बाद बेटों ने अंतिम संस्कार से किया मना, शव को घर में रखा, पुलिस को करनी पड़ी सख्ती

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। मध्य-प्रदेश से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।