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एमपी के मंदसौर में रावण की प्रतिमा के ऊपर क्यों रखा गया गधा? महिलाएं करती हैं घूंघट, पैर में धागा बांधने की भी है मान्यता

 Written By: Rituraj Tripathi
 Published : Oct 19, 2026 04:28 pm IST,  Updated : Oct 19, 2026 04:28 pm IST

मध्य प्रदेश के मंदसौर में रावण की प्रतिमा के ऊपर गधा रखा गया है और इसके पीछे की एक वजह भी है। हालांकि दिलचस्प बात ये है कि यहां महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करती हैं।

Mandsaur- India TV Hindi
मंदसौर में रावण की प्रतिमा के ऊपर गधा रखा गया, महिलाएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करती हैं Image Source : REPORTER INPUT

Highlights

  • मंदसौर में है रावण की ससुराल
  • औरतें करती हैं घूंघट
  • रावण की प्रतिमा के पैर में बांधती हैं धागा

मंदसौर: मंदसौर जिले को रावण का ससुराल माना जाता है, यानी उसकी पत्नी मंदोदरी का मायका। यहां के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की प्रतिमा स्थापित है, जिसके 10 सिर हैं,प्रतिमा की लगभग ऊंचाई 35 फिट हैं। 

रावण मंदसौर का दामाद था, इसलिए महिलाएं जब प्रतिमा के सामने पहुंचती हैं तो घूंघट डाल लेती हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में दशहरे के मौके पर रावण के पुतलों का दहन किया जाता हैं। लेकिन मध्य प्रदेश में कई स्थान ऐसे हैं, जहां रावण का दहन नहीं होता है, बल्कि उसकी पूजा की जाती है। 

मंदसौर में तो लोग रावण को अपने क्षेत्र का दामाद मानते हैं और उसकी पूजा करते हैं। यहां की बहुएं रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट डालकर जाती हैं। मंदसौर जिले पूर्व में इस जिले को दशपुर के नाम से पहचाना जाता था। यहां के खानपुरा क्षेत्र में रुण्डी नामक स्थान पर रावण की प्रतिमा स्थापित है, जिसके 10 सिर हैं।

रावण के सिर पर गधे का सिर क्यों लगाया?

रावण की बुद्धि भ्रष्ट होने की वजह से प्रतीक के रूप में उसके सिर पर गधे का सिर लगा रखा हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, दशहरा के दिन यहां के नामदेव समाज के लोग प्रतिमा के समक्ष उपस्थित होकर पूजा-अर्चना करते हैं। उसके बाद राम और रावण की सेनाएं निकलती हैं। रावण के वध से पहले लोग रावण के समक्ष खड़े होकर क्षमा-याचना मांगते हैं। वे कहते हैं, ‘आपने सीता माता का हरण किया था, इसलिए राम की सेना आपका वध करने आई है।’

उसके बाद प्रतिमा स्थल पर अंधेरा छा जाता है और फिर उजाला होते ही राम की सेना उत्सव मनाने लगती है। स्थानीय लोग बताते हैं कि रावण मंदसौर का दामाद था, इसलिए महिलाएं जब प्रतिमा के सामने पहुंचती हैं तो घूंघट डाल लेती हैं। 

रावण के पैर में धागा क्यों बांधती हैं महिलाएं?

मान्यता है कि इस प्रतिमा के पैर में धागा बांधने से बीमारी नहीं होती। यही कारण है कि अन्य अवसरों के अलावा महिलाएं दशहरे के मौके पर रावण की प्रतिमा के पैर में धागा बांधती हैं। कई महिलाएं संतान सुख के लिए भी मन्नत मांगी जाती हैं।

विदिशा में रावण को कहते हैं बाबा

इसी तरह एमपी के विदिशा जिले के नटेरन तहसील में रावण गांव में रावण की पूजा होती है। इस गांव में लोग रावण को बाबा कहकर पूजते हैं। यहां उसकी मूर्ति भी है और सभी काम शुरू होने से पहले रावण की प्रतिमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि रावण की पूजा किए बगैर कोई भी काम सफल नहीं होता। इतना ही नहीं नवदंपति रावण की पूजा के बाद ही गृह प्रवेश करते हैं। 

कुछ लोग परंपराओं का पालन करते हुए उसे आज पूज रहे हैं। मंदसौर को रावण की ससुराल माना जाता है, इसीलिए लोग उसे पूजते हैं। दामाद कैसा भी हो, उसका ससुराल में तो सम्मान होता ही है। रावण की पूजा तो होती है, मगर इसके ऐतिहासिक और धार्मिक ग्रंथों में उदाहरण कहीं नहीं मिलते। सब कुछ परंपराओं के अनुसार चलता आ रहा है। सुबह पूजा अर्चना के बाद शाम को गोधुली बेला में रावण का दहन किया जाता हैं।

माना जाता हैं की ये प्रतिमा लगभग 200 साल पुरानी है, इस प्रतिमा को कई बार प्राकतिक आपदा के कारण रिपेयर भी किया जा चुका है।

इस बार विजयादशमी कब मनाई जाएगी 20 या 21 अक्टूबर? जानें रावण दहन का शुभ मुहूर्त (रिपोर्ट- अशोक परमार)

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