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केन-बेतवा लिंक परियोजना के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे अमित भटनागर ने खत्म की भूख हड़ताल, मां के कहने पर लिया फैसला; 18 दिन चली हड़ताल

 Written By: Amar Deep @amardeepmau
 Published : Jul 24, 2026 09:04 am IST,  Updated : Jul 24, 2026 09:18 am IST

केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के कारण विस्थापन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। 18 दिन के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की।

अमित भटनागर ने खत्म की भूख हड़ताल।- India TV Hindi
अमित भटनागर ने खत्म की भूख हड़ताल। Image Source : PTI/FILE

छतरपुर: मध्य प्रदेश में केन-बेतवा नदी को जोड़ने की परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं के कारण विस्थापन के विरोध में प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ता अमित भटनागर ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है। 18 दिन के बाद उन्होंने अपनी भूख हड़ताल समाप्त की। अमित भटनागर के भाई अंकित ने बताया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद जब वे अपने गृह नगर बिजावर (छतरपुर) पहुंचे, तो उनकी मां ने उन्हें भूख हड़ताल समाप्त करने के लिए राजी किया। अंकित ने कहा, "उनकी तबीयत ठीक नहीं थी। घर पहुंचने पर हमारी मां ने उनसे भूख हड़ताल तोड़ने को कहा।"

19 जुलाई को खत्म कराया गया प्रदर्शन

वहीं छतरपुर के कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने बताया कि अमित भटनागर की तबीयत में सुधार होने के बाद उन्हें गुरुवार को उनके गृह नगर भेज दिया गया। पुलिस द्वारा विरोध स्थल से हटाए जाने के बाद उन्हें पहले उन्हें बिजावर सिविल अस्पताल और बाद में जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। बता दें कि इससे पहले छतरपुर पुलिस ने मानसून के दौरान बरना नदी में बढ़ते जलस्तर का हवाला देते हुए 19 जुलाई को कुपी गांव में विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर दिया था। अमित भटनागर ने तब बताया था कि उनकी भूख हड़ताल जारी रहेगी।

परियोजना में भ्रष्टाचार का आरोप

बता दें कि यह विरोध प्रदर्शन 3 जुलाई को बाराना नदी पर निर्माणाधीन पुल के नीचे शुरू हुआ था। प्रदर्शनकारियों ने केन-बेतवा लिंक परियोजना और अन्य सिंचाई योजनाओं से विस्थापित हुए लोगों के पुनर्वास और मुआवजे के भुगतान में अनियमितताओं की जांच की मांग की। साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए वैधानिक अधिकारों की भी मांग की। उन्होंने पुनर्वास पैकेजों के कार्यान्वयन में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और उन परिवारों के लिए न्याय सुनिश्चित करने हेतु निष्पक्ष जांच की मांग की जिन्हें अभी तक लाभ नहीं मिला है।

नारियल पानी पीकर खत्म किया अनशन

अमित भटनागर ने नारियल पानी पीकर अपना अनशन समाप्त किया। स्थानीय संगठन 'जय किसान संगठन' ने एक बयान में आरोप लगाया कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान उनके परिवार, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और साथी प्रदर्शनकारियों को उनसे मिलने नहीं दिया गया। संगठन ने यह भी दावा किया कि कई गांवों में महिलाओं ने आंदोलन के समर्थन में चूल्हा बंद कर दिया है। संगठन ने अमित भटनागर के हवाले से कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति, राजनीतिक दल या सरकार के खिलाफ निर्देशित नहीं है, बल्कि आदिवासी समुदायों और परियोजना से प्रभावित परिवारों के संवैधानिक, पर्यावरणीय और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए है। 

पन्ना जिले से थी ज्यादातर शिकायतें

कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने कहा कि प्रदर्शनकारियों द्वारा उठाई गई अधिकांश शिकायतें पड़ोसी पन्ना जिले के गांवों से संबंधित थीं, जबकि विरोध प्रदर्शन छतरपुर में किया गया था। उन्होंने कहा, "यदि छतरपुर जिले से संबंधित कोई शिकायत है, तो उसे हमें प्रस्तुत किया जाना चाहिए। इसकी विधिवत जांच की जाएगी और आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। यदि उनके पास प्रभावित व्यक्तियों की सूची है, तो वे इसे भी प्रशासन को प्रदान कर सकते हैं।"

क्या है केन-बेतवा लिंक परियोजना

दरअसल, 44605 ​​करोड़ रुपये की लागत वाली केन-बेतवा लिंक परियोजना राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना के अंतर्गत देश की पहली नदी-जोड़ परियोजना है। इसका उद्देश्य मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में फैले सूखाग्रस्त बुंदेलखंड क्षेत्र में 10 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करना, लगभग 62 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना और जलविद्युत उत्पन्न करना है।

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