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मध्य प्रदेश: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में 'खेत बचाओ अभियान' का शुभारंभ किया, जानें क्या कहा

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jun 01, 2026 05:47 pm IST,  Updated : Jun 01, 2026 05:50 pm IST

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से खेत बचाओ अभियान का शुभारंभ करके किसानों के हित में एक बड़ा कदम उठाया है।

Shivraj Singh Chouhan- India TV Hindi
खेत बचाओ अभियान का हुआ शुभारंभ Image Source : X@OFFICEOFSSC

रायसेन: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज मध्य प्रदेश के रायसेन जिले से "खेत बचाओ अभियान" का शुभारंभ किया। एक महीने तक चलने वाला यह अभियान 30 जून तक जारी रहेगा। इसका शुभांरभ रायसेन के ग्राम रामसिया से किया गया है।

क्या है इस अभियान का मुख्य उद्देश्य?

इस अभियान का मुख्य उद्देश्य ये है कि किसानों द्वारा उर्वरकों का संतुलित और विवेकपूर्ण उपयोग हो और मौसम संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए किसानों को समय पर सलाह मिले। इसके अलावा पंचायत स्तर पर सक्रिय भागीदारी और योजनाओं के लाभ सीधे गांवों तक पहुंचें।

"खेत बचाओ अभियान" के शुभारंभ के मौके पर क्या बोले शिवराज?

शिवराज सिंह ने खेत बचाओ अभियान के शुभारंभ के मौके पर कहा, "अनावश्यक पेस्टिसाइड पर कंट्रोल, खेती के मुनाफे में बड़ा रोल निभाएगा। खेत बचाओ अभियान से खेत की सेहत सुधरेगी। खेत को केमिकल के कहर से बचाना है, खेत को खुशहाली का नया केंद्र बनाना है।"

शिवराज ने कहा, "खेत बचाओ अभियान इसलिए है ताकि हमारी माटी बर्बाद न हो, हमारी खेती बर्बाद न हो, हमारी धरती बर्बाद न हो।" उन्होंने कहा, "यह संकल्प ​खेत की सेहत सुधारने का है, यह संकल्प खेत की लागत घटाने का है, यह संकल्प खेत को केमिकल के कहर से बचाने का है। आइये, धरती के स्वास्थ्य को बचाने के इस महा-अभियान से जुड़ें।"

शिवराज ने कहा, "धरती हमारी मां है। यही हमें अन्न देती है। एक समय बुआई पूरी और फसल की कटाई के बाद धरती माता की पूजा की जाती थी। ये हमारी परंपरा है। 'खेत बचाओ अभियान' धरती माता के लिए है। Soil Health Card मिट्टी के स्वास्थ्य की जानकारी देता है। जिन किसानों का मृदा स्वास्थ्य कार्ड नहीं बना है, हम अभियान चलाकर बनवाएंगे। अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, लेकिन आदरणीय प्रधानमंत्री ने तय किया कि किसान को सस्ता खाद उपलब्ध कराएंगे।"

शिवराज ने कहा, "अब खेती में आधुनिक तकनीक और मशीनों का उपयोग बढ़ाना होगा। सोयाबीन की सही बुवाई, रोग से बचाव और कम बारिश की संभावना को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके अपनाने होंगे।"

शिवराज सिंह ने बताया, "E-FARMS ऐप किसानों के लिए उपयोगी पहल है। अक्सर हमारे किसान भाई खेतों में जरूरत से ज्यादा खाद डाल देते हैं। उन्हें लगता है कि जितनी ज्यादा खाद, उतनी अच्छी फसल। इससे एक तो धरती मां का स्वास्थ्य बिगड़ता है और किसानों की जेब पर भी अनावश्यक बोझ आता है। यह ऐप मिट्टी के स्वास्थ्य और फसल की आवश्यकता के अनुसार सटीक सलाह देकर पैदावार बढ़ाने तथा लागत घटाने में मदद करता है। आज मैंने रायसेन में इस ऐप का लाइव डेमो भी देखा। मेरा सभी किसान भाई-बहनों से आग्रह है कि तकनीक का उपयोग करें और धरती मां के स्वास्थ्य को बनाए रखते हुए अपनी आय बढ़ाएं।"

शिवराज ने पौधा भी लगाया

प्रतिदिन पौधरोपण के संकल्प के क्रम में आज रायसेन जिले के ग्राम रामसिया में राष्ट्रव्यापी 'खेत बचाओ अभियान' के शुभारंभ के अवसर पर शिवराज ने पौधा भी लगाया। 

मानसून में देरी ने बढ़ाई चिंता

गौरतलब है कि इस बार मानसून देरी से आ रहा है, जिसका असर किसानों और उनकी फसलों पर भी पड़ सकता है। मानसून अब तक केरल नहीं पहुंचा है, ऐसे में मई में पूरे देश में भीषण गर्मी पड़ी है। बीते दिनों में बारिश तो हुई है लेकिन वह मानसून की बारिश नहीं है बल्कि गर्मी की वजह से धरती की सतह से पानी भाप बनकर ऊपर पहुंचा है और वही बादल बरस रहे हैं।

मौसम विभाग 3 बार मानसून की तारीखों को आगे बढ़ा चुका है। पहले मौसम विभाग ने बताया था कि मानसून 26 मई तक केरल पहुंच जाएगा, लेकिन फिर इसे बढ़ाकर 28 मई और फिर एक जून कर दिया गया। ताजा हालात ये हैं कि मौसम विभाग का कहना है कि मानसून के 3 जून से पहले आने की संभावना नहीं है।

भारत में मानसून में देरी का किसानों पर क्या असर पड़ेगा?

भारत में मानसून में देरी हुई तो किसानों पर बुरा असर देखने को मिलेगा क्योंकि भारत की कृषि मुख्य रूप से मानसून पर ही निर्भर है, खरीफ की फसलें बहुत ज्यादा प्रभावित होंगी। मानसून में देरी होने पर बुवाई देरी से होगी तो पैदावार और आय भी प्रभावित होगी। गौरतलब है कि जब मानसून देर आता है तो मिट्टी में नमी की कमी रहती है। ऐसे में बुवाई टल जाती है या बीज सूख सकते हैं। इससे किसान बहुत प्रभावित होता है। 

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