भोजशाला विवाद के बाद अब एक नया विवाद सामने आ रहा है। मध्य प्रदेश के धार में ASI द्वारा संरक्षित एक स्मारक को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। मुस्लिम समुदाय इसे 'लाट मस्जिद' कहता है, जबकि हिंदू समूह इसे 'विजय मंदिर' या मार्तंडय मंदिर मानते हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया, जब 'सनातन प्रहरी संस्था' ने 15 सितंबर 2026 को वराह मार्च निकालने की घोषणा की, जबकि जिला प्रशासन ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया और शहर भर से इससे जुड़े बैनर हटा दिए।
स्मारक पर अलग-अलग दावे
हिंदू संगठनों का दावा है कि यह इमारत मस्जिद नहीं, बल्कि परमार काल का एक मंदिर है। इसे राजा भोज ने तेलंगाना क्षेत्र पर अपनी जीत की याद में बनवाया था, इसलिए इसका नाम 'विजय मंदिर' पड़ा। वे मंदिर होने के सबूत के तौर पर वहां मौजूद अष्टधातु के खंभे का जिक्र करते हैं; कहा जाता है कि यह खंभा जंग-रोधी है और इसे राजा भोज ने ही लगवाया था। दूसरी ओर, मुस्लिम समुदाय इस जगह को 'लाट मस्जिद' मानता है और ऐतिहासिक रूप से यहां ईद की नमाज अदा करता रहा है। यह स्मारक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधिकार क्षेत्र में आता है, जो इसे राष्ट्रीय महत्व की संरक्षित इमारत मानता है।
विवादित धार्मिक मुद्दा
इस जगह पर लंबे समय से साझा धार्मिक गतिविधियां होती रही हैं, जो अब विवाद की वजह बन गई हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग इस स्मारक पर ईद की नमाज अदा करते हैं। हिंदू समुदाय के लोग दशहरा के अगले दिन 'दशहरा मिलन' समारोह आयोजित करते हैं और वहां देवता की प्रतिमा स्थापित करते हैं। हिंदू समूह परिसर के अंदर एक खंभे पर बनी वराह की प्रतिमा को भी अपने दावे और प्रस्तावित मार्च का मुख्य आधार बताते हैं।
वराह मार्च की घोषणा और प्रशासन का विरोध
ASI की जगहों पर धार्मिक गतिविधियों के इस तरह एक-दूसरे से जुड़े होने के कारण अक्सर तब तनाव की स्थिति पैदा हो जाती है, जब संगठित सार्वजनिक जुलूस निकालने का प्रस्ताव रखा जाता है। सनातन प्रहरी संस्था ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में वराह मार्च की घोषणा की। संस्था ने बताया कि यह मार्च 15 सितंबर 2026 को निकाला जाएगा, ताकि लोग स्मारक पर भगवान वराह के सामूहिक दर्शन कर सकें। आयोजकों का दावा था कि इस कार्यक्रम के लिए लगभग 14,000 लोगों ने पंजीकरण कराया है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि वे केवल दर्शन करना चाहते हैं, इसलिए इसके लिए औपचारिक अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
संरक्षित स्मारकों पर कार्यक्रमों को लेकर ASI का स्पष्ट रुख
हालांकि, धार प्रशासन ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया और नियमों का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। पुलिस ने शहर भर में मार्च का प्रचार करने वाले होर्डिंग, फ्लेक्स बैनर और कटआउट हटाने शुरू कर दिए, जिसके बाद संस्था ने सेंसरशिप का आरोप लगाया। ASI के अधिकारी प्रशांत पाटणकर ने स्पष्ट किया कि ASI राष्ट्रीय महत्व के स्मारकों पर मनोरंजन कार्यक्रमों, बैठकों, समारोहों, पार्टियों या सम्मेलनों की अनुमति नहीं देता है। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के आने-जाने की तो अनुमति है, लेकिन परिसर में कोई कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जा सकता और उल्लंघन करने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस रुख के कारण उस जगह पर धार्मिक सभाओं और राजनीतिक रैलियों, दोनों पर ही रोक लग जाती है, चाहे उन्हें कोई भी समुदाय आयोजित कर रहा हो।
कानून व्यवस्था की स्थिति और आगे के कदम
CSP शशांक सिंह गुर्जर सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने लोगों से मार्च में शामिल न होने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी रैली के लिए अनुमति नहीं दी गई है। जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि 15 सितंबर को स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत और सुव्यवस्थित होगी। सनातन प्रहरी संस्था के आगे बढ़ने की जिद और प्रशासन के इसे लागू करने के संकल्प के बीच, धार में लाट मस्जिद/विजय मंदिर वाली जगह पर तनावपूर्ण गतिरोध की स्थिति बनी हुई है।
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