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पुलिस हिरासत में पीट-पीटकर मौत मामले में 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद, 15 साल बाद आया फैसला

 Edited By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Jul 02, 2026 05:18 pm IST,  Updated : Jul 02, 2026 05:34 pm IST

पुलिस हिरासत में जिन 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है, उन सभी के नाम सामने आ गए हैं। ये मामला 10 मई 2011 का है।

पुलिस हिरासत में हुई थी मौत- India TV Hindi
पुलिस हिरासत में हुई थी मौत Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के वाशिम जिला एवं सत्र न्यायालय ने पुलिस हिरासत में हुई मौत के बहुचर्चित मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। रिसोड पुलिस स्टेशन में चोरी के मामले में संदिग्ध बेग्या पवार की कथित पुलिस पिटाई से हुई मौत के मामले में अदालत ने तत्कालीन थाना प्रभारी समेत 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फैसला घटना के करीब 15 साल बाद आया है।

हिरासत में पिटाई से चली गई थी जान

यह मामला 10 मई 2011 का है, जब रिसोड पुलिस स्टेशन में चोरी के एक मामले में पूछताछ के लिए लाए गए संदिग्ध बेग्या पवार की पुलिस हिरासत में मौत हो गई थी। आरोप था कि पुलिसकर्मियों की पिटाई के कारण उसकी जान गई।

CID ने की थी इस मामले की जांच

इस मामले की जांच सीआईडी ने की थी। 34 दिनों की जांच के बाद सीआईडी ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या और विशेष अत्याचार अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था।

सामने आए पुलिसकर्मियों के नाम

लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद वाशिम के जिला एवं सत्र न्यायालय में इस मामले की सुनवाई पूरी हुई। वाशिम के जिला एवं सत्र न्यायालय के जिला न्यायाधीश जयसिंग झपाटे ने सुनवाई पूरी होने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी महादेव माणिक धांडे सहित मदन केशव पवार, शिवाजी नामदेव खिल्लारी, पंजाब माणिकराव पाटकर, रमेश सीताराम पवार, प्रकाश हिरालाल तारम, नागोराव भगवान खांडके, अशोक निवृत्ती वैद्य और वसंत कणिराम जाधव हैं। कुल 9 पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।

परिजनों ने कहा- आखिर मिल गया न्याय

अदालत के इस फैसले के बाद मृतक बेग्या पवार के परिजनों ने राहत और संतोष व्यक्त किया। परिवार का कहना है कि न्याय मिलने के लिए उन्हें लगभग डेढ़ दशक तक इंतजार करना पड़ा, लेकिन आखिरकार अदालत ने दोषियों को सजा देकर न्याय किया। परिजनों ने उम्मीद जताई कि इस फैसले से भविष्य में पुलिस हिरासत में होने वाली ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में मदद मिलेगी और कानून का दुरुपयोग करने वालों को कड़ा संदेश जाएगा।

साथ ही मृतक के पिता नयणु फैसल्या पवार ने कहा कि उनके परिवार ने वर्षों तक न्याय के लिए संघर्ष किया और अब अदालत के फैसले से उन्हें यह भरोसा मिला है कि देर से ही सही, लेकिन न्याय जरूर मिलता है।

इमरान की रिपोर्ट

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