महाराष्ट्र के अंबरनाथ में पांच महीने से जारी सियासी ड्रामा अब खत्म हो सकता है। उपनगराध्यक्ष सदाशिव (मामा) पाटिल ने शिवसेना-भाजपा से आपसी रंजिश खत्म करने की अपील की है। अंबरनाथ नगर परिषद चुनाव समाप्त हुए पांच महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक शिवसेना और भाजपा के बीच युति नहीं होने के कारण शहर के कई महत्वपूर्ण विकास कार्य ठप पड़े हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर शहर के उपनगराध्यक्ष सदाशिव (मामा) पाटिल ने दोनों दलों से आपसी मतभेद भुलाकर एक साथ आने की अपील की है।
उपनगराध्यक्ष सदाशिव (मामा) पाटिल ने कहा कि अंबरनाथ की जनता ने विकास के लिए जनप्रतिनिधियों को चुना है, लेकिन राजनीतिक खींचतान के कारण नागरिकों को मूलभूत सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है। सड़क, पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य और अन्य विकास कार्यों पर इसका सीधा असर दिखाई दे रहा है।
अंबरनाथ के हित में निर्णय लेने की अपील
शिवसेना नेता ने कहा कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण और शिवसेना के सांसद श्रीकांत शिंदे दोनों वरिष्ठ नेता मिलकर सभी विवादों को समाप्त करें और महायुति को मजबूत बनाएं, ताकि शहर के रुके हुए विकास कार्यों को गति मिल सके। पाटिल ने आगे कहा कि जनता को राजनीति नहीं, विकास चाहिए। इसलिए दोनों पक्षों को व्यक्तिगत और राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर अंबरनाथ के हित में निर्णय लेना चाहिए। यदि जल्द ही महायुति बनती है, तो शहर के अधूरे प्रकल्पों को पूरा करने में तेजी आएगी और नागरिकों को राहत मिलेगी।
स्थानीय नागरिक भी महायुति गठबंधन के सपोर्ट में
स्थानीय नागरिकों का भी मानना है कि विकास कार्यों के लिए स्थिर सत्ता आवश्यक है और इसके लिए शिवसेना-भाजपा का साथ आना जरूरी है। अब सबकी नजर दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के निर्णय पर टिकी हुई हैं।
क्या है मामला?
अंबरनाथ निकाय चुनाव में शिवसेना ने 60 से 27 सीटें जीती थी और सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि, वह बहुमत से 4 सीटें पीछे रह गई थी। वहीं, बीजेपी को 14 और कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। बीजेपी ने शिवसेना को रोकने के लिए कांग्रेस के 12 सदस्यों का समर्थन लिया और एनसीपी (अजित गुट) के सदस्यों के समर्थन से अध्यक्ष का चुनाव जीत लिया। बीजेपी की तेजश्री करंजुले पाटिल अध्यक्ष बनीं। वहीं, शिवसेना ने एनसीपी के चार सदस्यों का साथ लेकर उपाध्यक्ष पद हासिल कर लिया। मामला अदालत में पहुंचा तो अदालत ने किसी भी दल की सरकार को सही मानने से इंकार कर दिया। वहीं, कलेक्टर से सभी पक्षों को सुनने के बाद एक्शन लेने की बात कही। अभी भी मामला विवाद में अटका हुआ है और यहां कोई भी दल सरकार नहीं बना पाया है।
(अंबरनाथ से सुनील शर्मा की रिपोर्ट)
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