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गढ़चिरौली में 14 सरेंडर माओवादियों को मिले जमीन के प्लॉट, बच्चों को साइकिल और पढ़ाई का सामान भी बांटा

 Reported By: Yogendra Tiwari Written By: Dhyanendra Chauhan
 Published : Sep 01, 2026 08:25 pm IST,  Updated : Sep 01, 2026 09:15 pm IST

गढ़चिरौली पुलिस के मुताबिक, जिले में अब तक 819 माओवादी पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार की सरेंडर स्कीम के तहत इन लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए जमीन, मकान, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत विभिन्न प्रकार की मदद दी जा रही है।

सरेंडर माओवादियों को मिला पुनर्वास योजना का लाभ- India TV Hindi
सरेंडर माओवादियों को मिला पुनर्वास योजना का लाभ Image Source : REPORTER INPUT

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में नक्सलवाद अब लगभग खत्म हो गया है। साल 2005 से सरकार द्वारा घोषित सरेंडर स्कीम की वजह से कई बड़े माओवादी पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके हैं। इन सरेंडर किए गए  माओवादी सदस्यों के पुनर्वास और मुख्यधारा में लाने की कोशिशों के तहत ‘प्रोजेक्ट संजीवनी' चलाया जा रहा है।

आर्थिक सहायता के लिए दिए गए चेक

नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के साथ सरेंडर करने वाले माओवादियों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी जारी है। इसी कड़ी में 1 सितंबर 2026 को ‘प्रोजेक्ट संजीवनी’ के तहत 14 सरेंडर माओवादी सदस्यों को जमीन के प्लॉट आवंटित किए गए। इसके अलावा अन्य सरेंडर माओवादियों को पुनर्वास योजना के तहत आर्थिक सहायता के चेक भी दिए गए।

जिले में अब तक 819 माओवादी ने किया सरेंडर

गढ़चिरौली पुलिस के मुताबिक, जिले में अब तक 819 माओवादी पुलिस के सामने सरेंडर कर चुके हैं। महाराष्ट्र सरकार की सरेंडर स्कीम के तहत इन लोगों को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए जमीन, मकान, रोजगार और स्वास्थ्य सुविधाओं समेत विभिन्न प्रकार की मदद दी जा रही है।

अब तक 174 प्लॉट मंजूर

पुनर्वास अभियान के तहत जिला प्रशासन और गढ़चिरौली पुलिस के समन्वय से सरेंडर किए गए माओवादी सदस्यों के लिए अब तक 174 जमीन के प्लॉट मंजूर किए गए हैं। इनमें से 153 प्लॉट पहले ही आवंटित किए जा चुके हैं। मंगलवार को 14 और सरेंडर माओवादी सदस्यों को प्लॉट दिए गए।

बच्चों को साइकिल और पढ़ाई का सामान

पुनर्वास कार्यक्रम के दौरान सरेंडर माओवादी सदस्यों के बच्चों को साइकिल और पढ़ाई से जुड़ा सामान भी वितरित किया गया। इसके साथ ही पात्र माओवादी सदस्यों को ड्राइविंग लाइसेंस भी दिए गए।

 समाज की मुख्यधारा से जोड़ना मुख्य लक्ष्य

पुलिस और जिला प्रशासन का कहना है कि पुनर्वास की इन योजनाओं का उद्देश्य सरेंडर करने वाले माओवादी सदस्यों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन का अवसर देकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना है।

अब दोबारा नहीं उठाएंगे हथियार

सरेंडर करने वाले माओवादियों ने भी कहा कि वह अब दोबारा से हथियार नहीं उठाएंगे। समाज के लोगों के बीच अमन और चैन से रहेंगे और रोजगार के माध्यम से अपना घर-परिवार चलाएंगे।

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