Highlights
- महाराष्ट्र में 5,211 कमर्शियल ड्राइवरों का टेस्ट हुआ, 777 मराठी के व्यावहारिक ज्ञान में फेल हुए।
- 777 में 722 ड्राइवर मुंबई महानगर क्षेत्र के हैं, सभी को एक महीने का समय मिला है।
- नियम तोड़ने पर लाइसेंस निलंबन और बार-बार उल्लंघन पर परमिट रद्द हो सकता है।
मुंबई: महाराष्ट्र में कमर्शियल वाहन चालकों के लिए मराठी भाषा का व्यावहारिक ज्ञान अब जरूरी हो गया है। इसी नियम के तहत परिवहन विभाग ने शुक्रवार को राज्यभर में ड्राइवरों की जांच की। इस दौरान 5211 कमर्शियल ड्राइवरों का मराठी भाषा का टेस्ट लिया गया, जिसमें 777 ड्राइवर तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इन सभी 777 ड्राइवरों को परिवहन विभाग ने नोटिस जारी किया है। नोटिस में उन्हें एक महीने के भीतर मराठी का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने का निर्देश दिया गया है। ऐसा नहीं करने पर उनके खिलाफ आगे की कार्रवाई हो सकती है, जिसमें ड्राइविंग लाइसेंस या उससे जुड़ी अनुमति को निलंबित या रद्द करने तक की कार्रवाई शामिल है।
फेल हुए 777 में से 722 ड्राइवर मुंबई क्षेत्र से
अधिकारियों के मुताबिक, मराठी भाषा के व्यावहारिक ज्ञान में कमजोर पाए गए 777 ड्राइवरों में से 722 मुंबई महानगर क्षेत्र यानी कि MMR से हैं। परिवहन विभाग ने शुक्रवार को मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के दूसरे हिस्सों में भी यह जांच अभियान चलाया। सरकार का कहना है कि कमर्शियल वाहन चालकों के लिए स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान इसलिए जरूरी है, ताकि वे यात्रियों से आसानी से बातचीत कर सकें, उनकी समस्याओं को समझ सकें और सफर को सुरक्षित और सुविधाजनक बना सकें। इस तरह देखा जाए तो मराठी के इस टेस्ट में 5211 ड्राइवरों में से 4434 ड्राइवर पास हुए और 777 ड्राइवर फेल हो गए।
किस तरह के ड्राइवरों पर लागू होगा नियम?
महाराष्ट्र सरकार ने ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और कैब ड्राइवरों के लिए मराठी के व्यावहारिक ज्ञान को जरूरी करने का निर्देश दिया है। इसमें ऐप आधारित कैब चलाने वाले ड्राइवर भी शामिल हैं। 12 अगस्त को महाराष्ट्र सरकार ने इस नियम को औपचारिक रूप से लागू किया था। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया था कि इसके लिए महाराष्ट्र मोटर व्हीकल्स (अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 में बदलाव किए गए हैं। इन संशोधनों के जरिए 1989 के पुराने नियमों में स्थानीय भाषा से जुड़ी शर्तों को और स्पष्ट किया गया है।

नए नियमों के तहत अगर कोई ड्राइवर मराठी का व्यावहारिक ज्ञान साबित नहीं कर पाता है, तो उसकी ड्राइविंग लाइसेंस की अनुमति 3 महीने तक निलंबित की जा सकती है। नियमों का बार-बार उल्लंघन करने पर उसका परमिट स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है।
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री ने क्या कहा?
महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने हाल ही में कहा था कि कमर्शियल ड्राइवर अगर मराठी सीखने से इनकार करते हैं तो सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी। उन्होंने अब कहा है कि नए बदलावों से नियमों को लेकर किसी भी तरह की अस्पष्टता दूर होगी और यात्री वाहन चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी के महत्व को साफ तौर पर बताया गया है। उन्होंने कहा,
'इन संशोधनों से नियमों में मौजूद अस्पष्टता दूर होती है और यात्री वाहन चालकों के लिए व्यावहारिक मराठी के महत्व को और स्पष्ट किया गया है। यात्रियों से बातचीत करने, उनकी समस्याओं को समझने और सुरक्षित व सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय भाषा का व्यावहारिक ज्ञान जरूरी है।'
'बाहर से आए लोगों को समय मिलना चाहिए'
सरकार के इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में रोजगार के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों को स्थानीय भाषा सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। गिरिराज सिंह ने कहा,
'सरकार को महाराष्ट्र से बाहर से आकर यहां अपनी रोजी-रोटी कमाने वाले लोगों को स्थानीय भाषा सीखने और बोलने के लिए एक निश्चित समय देना चाहिए। मैं यह नहीं कह रहा कि महाराष्ट्र में रोजी-रोटी कमाते समय स्थानीय भाषा नहीं आनी चाहिए। मेरा मानना है कि लोगों को स्थानीय भाषा सीखनी चाहिए, लेकिन उन्हें इसके लिए समय भी दिया जाना चाहिए।'
अब 777 ड्राइवरों के सामने क्या विकल्प है?
परिवहन विभाग की ओर से नोटिस पाने वाले 777 ड्राइवरों को अब एक महीने के भीतर मराठी का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करना होगा। अगर वे ऐसा करने में नाकाम रहते हैं तो उनके खिलाफ नियमों के तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है। बार-बार नियम तोड़ने पर कार्रवाई और सख्त हो सकती है और परमिट स्थायी रूप से रद्द किया जा सकता है। यानी महाराष्ट्र में कमर्शियल वाहन चलाने वाले ड्राइवरों के लिए मराठी सीखना अब सिर्फ सरकारी सलाह नहीं, बल्कि नियमों का हिस्सा बन गया है। (ANI से इनपुट्स के साथ)
ये भी पढ़ें: पूरे महाराष्ट्र में मराठी भाषा को लेकर जांच अभियान शुरू, 1268 चालकों को नोटिस, 1 महीने का मौका, फिर क्या होगा?