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फर्जी रजिस्ट्रेशन का बड़ा खेल! चोरी के ट्रकों के नेटवर्क का पर्दाफाश, पढ़ें Exclusive खबर

 Reported By: Yogendra Tiwari Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jul 09, 2026 09:04 am IST,  Updated : Jul 09, 2026 10:26 am IST

महाराष्ट्र में नागपुर RTO और पुलिस ने चोरी के ट्रकों का फर्जी दस्तावेजों से दोबारा रजिस्ट्रेशन कर देशभर में बेचने वाले गिरोह का खुलासा किया है। इस दौरान 1,587 संदिग्ध ट्रकों की पहचान हुई, 495 पर कार्रवाई की गई और 223 का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया।

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नागपुर में चोरी के ट्रकों के बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। Image Source : REPORTER'S INPUT

नागपुर: चोरी के ट्रकों का फर्जी दस्तावेजों के जरिए दोबारा रजिस्ट्रेशन कर उन्हें अलग-अलग राज्यों में बेचने वाले एक बड़े गिरोह का खुलासा हुआ है। इस मामले में नागपुर के कपिल नगर पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई है। नागपुर ग्रामीण RTO अधिकारी विजय चौहान ने एक्सक्लूसिव बातचीत में बताया कि यह गिरोह मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सक्रिय है। गिरोह चोरी के ट्रकों का फर्जी दस्तावेज तैयार कर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराता है और फिर उन्हें नई गाड़ी बताकर बेच देता है।

'कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं'

विजय चौहान के मुताबिक, RTO के पास फिलहाल 1,587 ट्रकों की पुख्ता जानकारी है, जिनके चेसिस नंबर संदिग्ध पाए गए हैं। इनमें कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अब तक 495 ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है और अलग-अलग पुलिस थानों में इनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं RTO ने अपने स्तर पर 223 वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी रद्द कर दिया है। RTO अधिकारी ने बताया,

'गिरोह सबसे पहले मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों में चोरी के ट्रकों के लिए मैन्युअल दस्तावेज तैयार करता था। इन दस्तावेजों पर जरूरी मुहरें और कागजी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद इन्हें नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश भेज दिया जाता था।'

नई गाड़ी के रूप में बेच दिए जाते थे ट्रक

चौहान ने बताया कि मैन्युअल दस्तावेजों के आधार पर बाद में वाहन पोर्टल (VAHAN) पर ट्रकों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जाता था। रजिस्ट्रेशन के दौरान यह दिखाया जाता था कि वाहन बिल्कुल नया है। करीब 10 दिन बाद वहां से NOC हासिल कर ली जाती थी। इसके बाद ट्रकों को उन राज्यों में भेज दिया जाता था, जहां इनके खरीदार पहले से तय रहते थे। वहां इनका दोबारा रजिस्ट्रेशन कर इन्हें नई गाड़ी के रूप में बेच दिया जाता था और ये ट्रक सामान्य रूप से सड़कों पर दौड़ते रहते थे।

कैसे हुआ पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा?

विजय चौहान ने बताया कि पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ, जब ये ट्रक फिटनेस टेस्ट के लिए पहुंचे। जांच के दौरान पाया गया कि कई वाहनों के चेसिस नंबर से छेड़छाड़ की गई थी। कई मामलों में चेसिस पर ग्राइंडर चलाकर नंबर मिटाने या बदलने के निशान मिले। जब इन चेसिस नंबरों की जानकारी संबंधित वाहन निर्माता कंपनियों से मांगी गई तो कंपनियों ने साफ बताया कि इन नंबरों वाली गाड़ियां उन्होंने कभी बनाई ही नहीं। यानी जिन चेसिस नंबरों पर वाहन चल रहे थे, वे कंपनियों के रिकॉर्ड में मौजूद ही नहीं थे।

कैसे तैयार किए जाते थे फर्जी कागजात?

जांच में यह भी सामने आया कि जिन राज्यों में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन व्यवस्था बाद में शुरू हुई, वहां से पुरानी आरसी (रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट) चोरी कर ली जाती थी। उन्हीं दस्तावेजों के आधार पर फर्जी कागजात तैयार किए जाते थे और उन्हें मैन्युअल रिकॉर्ड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। इसके बाद इन दस्तावेजों के जरिए नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराया जाता था।

'नागालैंड में न गाड़ी चाहिए, न मालिक'

RTO अधिकारी विजय चौहान ने दावा किया कि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि नागालैंड में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कई गंभीर खामियां हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां वाहन के निरीक्षण, मालिक की मौजूदगी या स्थानीय पते की कड़ी जांच के बिना भी रजिस्ट्रेशन हो जाता है। उन्होंने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के अनुसार किसी भी वाहन के रजिस्ट्रेशन से पहले उसका भौतिक निरीक्षण किया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ। उनका आरोप है कि बिना वाहन और बिना वैध आवासीय प्रमाण के भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन किए गए।

पुलिस जांच जारी, कई जगह जब्त हुए ट्रक

RTO की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस मामले की जांच कर रही है। अब तक 495 संदिग्ध ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है, जबकि 1,000 से अधिक वाहनों का सत्यापन अभी बाकी है। RTO ने स्पष्ट किया कि जिन 223 वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया गया है, वे सड़कों पर नहीं आने चाहिए। पुलिस ने मुंबई, मनमाड, नागपुर और चंद्रपुर समेत कई स्थानों पर ऐसे ट्रकों को जब्त भी किया है। RTO का कहना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस गिरोह से जुड़े और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं तथा बाकी संदिग्ध वाहनों का सत्यापन भी जल्द पूरा किया जाएगा।

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