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'फडणवीस के आगे-पीछे ठुमके लगाते हैं', BJP के किस मंत्री को संजय राउत ने बता दिया 'नचनिया'

 Published : Jun 04, 2025 12:47 pm IST,  Updated : Jun 04, 2025 12:47 pm IST

बीजेपी के मंत्री ने कहा था कि बाल ठाकरे की शिवसेना को जमींदोज किया जाएगा। इस पर शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत भड़क उठे हैं। उन्होंने मंत्री के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है।

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शिवसेना यूबीटी नेता संजय राउत Image Source : PTI

महाराष्ट्र की महायुति सरकार में बीजेपी के मंत्री गिरीश महाजन के एक बयान ने राज्य की राजनीति में हलचल मचा दी है। गिरीश महाजन ने कहा था कि बाल ठाकरे की शिवसेना को जमींदोज किया जाएगा। इस पर शिवसेना यूबीटी के नेता संजय राउत भड़क उठे हैं। राउत ने शिवसेना के मुखपत्र सामना में मंत्री के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली है। 

'MLA-सांसद बह जाते हैं, लेकिन शिवसेना है और रहेगी'

सामना के संपादकीय में संजय राउत ने लिखा है, "भाजपा के एक मंत्री गिरीश महाजन ने अहंकारभरा बयान दिया है कि हिंदूहृदयसम्राट शिवसेनाप्रमुख बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को जमींदोज किया जाएगा। जब सत्ता में कोई व्यक्ति मदांध हो जाता है तो क्या होता है, इसका महाजन एक अच्छा उदाहरण है। महाजन जैसे कई लोगों ने पिछले पचास वर्षों में शिवसेना को नष्ट करने की लफ्फाजी की है। शिवसेना केवल सांसदों, विधायकों और नगरसेवकों की तरह बिकनेवाली वस्तु नहीं है। शिवसेना विचारों के साथ आगे बढ़नेवाला एक संगठन है। चुनाव आते हैं और जाते हैं। विधायक, सांसद आदि भी बह जाते हैं, लेकिन शिवसेना है और रहेगी। जिन लोगों को शिवसेना ने नाम, छवि, प्रतिष्ठा और शक्ति दी, उनमें से कई को कभी कांग्रेस ने, कभी राष्ट्रवादी कांग्रेस ने तो कभी मौजूदा भारतीय जनता पार्टी ने खरीद लिया। फिर भी, शिवसेना है और रहेगी।''

'फडणवीस के आगे-पीछे ठुमके लगाते हैं महाजन'

गिरीश महाजन पर तीखा कटाक्ष करते हुए संजय राउत ने कहा कि वर्तमान राजनीति में गिरीश महाजन को ‘नाच्या’ कहा जाता है और यह सच भी है। फडणवीस के आगे-पीछे ठुमके लगाने के अलावा इस आदमी के पास कोई और उपलब्धि नहीं है। जामनेर निर्वाचन क्षेत्र का पूरा इलाका जहां से यह सज्जन चुने गए हैं, आज भी बंजर और श्मशान समान है। वहां लोगों को न्यूनतम नागरिक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।

संजय राउत ने चुन-चुनकर किया हमला, पढ़िए आगे क्या लिखा है-

  1. गिरीश महाजन 2024 के विधानसभा चुनाव में ‘बमुश्किल’ बहुमत से चुने गए थे। मतदाता सूची में हेराफेरी और पैसे के भारी वितरण के कारण उन्होंने बमुश्किल जीत हासिल की। ​​वोट खरीदना, दूसरे लोगों के चुने हुए लोगों को खरीदना उनका धंधा है और उनके अन्य धंधे और शौक क्या हैं, इस पर माननीय एकनाथ खडसे ने बार-बार प्रकाश डाला है। महाजन ने वित्तीय घोटाले, बैंक और जमीन हड़पने, पतपेढ़ियों में धोखाधड़ी, टेंडर हेराफेरी और दलाली से हजारों करोड़ की संपत्ति जमा की है। उन्होंने अपने इर्द-गिर्द ऐसे ही दलालों का जाल बिछा रखा है, जिसके चलते उन्हें एक नशा चढ़ा है, लेकिन यह आदमी तो अव्वल दर्जे का कायर और भगोड़ा है।
  2. अगर कल महाराष्ट्र में भाजपा सत्ता खो देती है तो गिरीश महाजन बाड़ फांदकर भाजपा छोड़नेवाला पहला भाजपाई होगा। जब पिछली सरकार ने उनके कुछ कुकृत्यों की जांच शुरू की थी तो वे भाग गए थे। वे भूमिगत भी हो गए थे। डर के कारण उन्हें दिन में चार-पांच बार पायजामे बदलने पड़ते थे और वे सरकार को संदेश दे रहे थे कि ‘चाहें तो मैं राजनीति से अलग हो जाता हूं, लेकिन मेरी जांच बंद करवा दीजिए। मैं तो आपका ही हूं।’ यानी ये सब सत्ता की कुर्सी पर बैठे ‘दादा’ और ‘भाई’ हैं और अगर वे ईडी और पुलिस के हाथ में नहीं हैं तो वे बिल में चूहे हैं! अगर सत्ता चली गई तो गिरीश महाजन उन लोगों की चौखट पर जानेवालों में सबसे पहले होंगे, जिनके हाथ में ईडी और पुलिस जैसी जांच एजेंसियां हैं।
  3. महाराष्ट्र में कई सवाल उठ खड़े हुए हैं। महाजन जिस उत्तरी महाराष्ट्र से आते हैं, वहां के किसान बेमौसम बारिश और अन्य संकटों के कारण परेशान हैं। किसान जमींदोज हो गए है, लेकिन जमींदोज हुए किसानों का साथ देने की बजाय महाजन बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना को जमींदोज करने निकले हैं। अमित शाह के गुर्गे इससे बढ़कर क्या सोच सकते हैं! महाजन ने राज्य में भ्रष्टाचारी, ठेकेदार और गुंडों के गिरोहों को पाला है। गृहमंत्री फडणवीस को महाराष्ट्र में गुंडागर्दी के मास्टरमाइंड के रूप में इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए, लेकिन यह आश्चर्य की बात है कि गृहमंत्री खुद गुंडों के इस खोखले सरदार को अपने साथ लेकर घूम रहे हैं।
  4. जलगांव, रावेर, धुले में हर गंभीर अपराध में महाजन द्वारा पोषित गुंडे शामिल हैं। उनके खिलाफ काम करनेवाले राजनीतिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस का दुरुपयोग करझूठे अपराधों में फंसाकर, उन पर दबाव बनाने और फिर उन्हीं लोगों को भाजपा में शामिल कराने का धंधा महाजन ने शुरू कर दिया है। शिवसेना के कुछ लोगों का गला महाजन ने इसी तरह फांसा था। यह बहादुरी या मर्दानगी नहीं, बल्कि नाच है। महाजन की अन्य उपलब्धियों के बारे में कई कहानियां बताई जा सकती हैं, लेकिन वक्त ने वह जिम्मेदारी उनके एक समय के गुरु महाराज एकनाथ खडसे को सौंप दी है।
  5. गिरीश महाजन जो चाहें कर सकते हैं, जिनकी चाहे पार्टी तोड़ दें। लाफ्फाजी करें, लेकिन एक बात का ध्यान रखें कि भारतीय लोकतंत्र ईमानदार जनता की कनिष्ठ उंगली पर गोवर्धन पर्वत की तरह टिका हुआ है। महाजन अन्य पार्टियों को खत्म करने की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें पहले यह पता लगाना चाहिए कि उनकी भारतीय जनता पार्टी बची है या नहीं। क्योंकि आज की भारतीय जनता पार्टी मूल भाजपा नहीं है, बल्कि एक ऐसी पार्टी है जो अन्य पार्टियों से लाए गए बेईमान, भ्रष्ट लोगों की घुसपैठ से भरी पार्टी बन गई है। क्या भाजपा के पास अपना कुछ बचा है? प्रफुल्ल पटेल (इकबाल मिर्ची फेम) जैसे लोग भाजपा के ब्रांड एंबेसडर बन गए हैं इसलिए शिवसेना को जमींदोज करने के लिए आपको पवित्र हाथ नहीं मिलेंगे। मूलरूप से, आपके सौ बाप भी आ जाएं तो भी यह संभव नहीं होगा।
  6. शिवसेना की स्थापना बालासाहेब ठाकरे के पवित्र हाथों और विचारों से हुई थी। मराठी लोगों के स्वाभिमान से यह चिंगारी उठी, हिंदुत्व की ज्वलंत भूमिका और आंदोलन से शिवसेना का तेज बढ़ा, निखरा यह कैसे फीकी पड़ेगी? सिर्फ इसलिए कि कुछ बिकाऊ लोग महाजन जैसों के साथ ‘ठुमके’ लगाने लगे, इसका मतलब यह नहीं है कि शिवसेना जमींदोज हो गई। इतिहास गवाह है कि शिवसेना को जमींदोज करने का सपना देखने वाले कई महाजन इसी जमीन पर दफना दिए गए हैं। महाजन, आप भी उसी मार्ग पर निकले हो। यह महाराष्ट्र अमित शाह की नीच राजनीति के आगे घुटने नहीं टेकेगा!
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