मुंबई:महाराष्ट्र विधानसभा में बहुविवाह पर बयान देकर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) विधायक सना मलिक अपने ही गठबंधन में ही घिर गई हैं। महायुति के नेताओं ने सना मलिक के बयान की आलोचना की है। शिवसेना की राष्ट्रीय प्रवक्ता शायना एनसी ने NCP विधायक सना मलिक के बयान पर कहा, "UCC की आवश्यकता है क्योंकि हिंदू, सिख और ईसाई सभी को एक समानता के साथ न्याय मिलना चाहिए। मैं सना मलिक से केवल एक बात पूछना चाहती हूं कि क्या आप अपने पति को अनुमति देंगी कि वे 4 बार शादी करें?।
शायना एनसी ने सना मलिक से पूछे तीखे सवाल
शायना एनसी ने कहा कि एक तरफ प्रधानमंत्री हैं, जिन्होंने तीन तलाक खत्म करके मुस्लिम महिलाओं को ज़्यादा सम्मान और सुरक्षा दी है। दूसरी तरफ सना मलिक हैं जो बहुविवाह (polygamy) पर विवादित बयान दे रही हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत इसकी इजाज़त है और सरकार को धार्मिक पर्सनल लॉ में दखल नहीं देना चाहिए। सरकार दखल क्यों न दे? क्या एक समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) नहीं होनी चाहिए जिसका सम्मान और पालन किया जाए? मुस्लिम पर्सनल लॉ को बिना जांच-परख के पूरी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कुरान का पालन करना एक बात है, लेकिन शादी, तलाक, विरासत और दूसरे नागरिक मामलों को समानता और न्याय के नज़रिए से देखा जाना चाहिए। इन क्षेत्रों में सुधारों का विरोध करने की कोई भी कोशिश सिर्फ़ वोट-बैंक की राजनीति की ओर झुकाव दिखाती है। मैं सना से गुज़ारिश करूँगी कि वे अपने कहे पर विचार करें, क्योंकि ऐसे बयान भारत की महिलाओं का अपमान करने के बराबर हैं। बहुविवाह अतीत की एक प्रथा और सोच है और आधुनिक, प्रगतिशील समाज में इसकी कोई जगह नहीं है।
सना मलिक ने दिया था ये बयान
वहीं सना मलिक ने बृहस्पतिवार को अपने उन बयानों का बचाव किया, जो उन्होंने मुस्लिम महिलाओं को 'तीन तलाक' के कारण होने वाले अत्याचारों पर मंगलवार को सदन में हुई चर्चा में भाग लेते हुए दिए थे। उन्होंने सदन में कहा था, ''यदि कुरान में कोई बात कही गई है और उसे पाकिस्तान में लागू किया जाता है, तो हम मांग करते हैं कि उसे यहां भी लागू किया जाये।' सना मलिक ने कहा कि इस मुद्दे को केवल मुसलमानों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के अनुसार बहुविवाह की अनुमति है और इसे लागू करने के लिए कुछ कदम भी उठाए जा रहे थे। मलिक ने कहा कि इस प्रथा को केवल एक समुदाय के दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। मुसलमानों पर ध्यान केंद्रित करने पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, ''क्या सभी प्रकार का उत्पीड़न केवल मुस्लिम महिलाओं के साथ ही होता है? उन्होंने कहा कि इस्लाम में बहुविवाह की अनुमति है। इसकी मुस्लिम कानून में भी अनुमति है। इसका उल्लेख कुरान में भी किया गया है।