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दिल्ली में सेकेंड-हैंड गाड़ी खरीद रहे हैं तो जान लीजिए ये नया नियम, वरना गलती करने पर पुलिस लेगी तगड़ा एक्शन!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Dec 21, 2025 06:59 am IST,  Updated : Dec 21, 2025 06:59 am IST

अगर आप दिल्ली में पुरानी कार या बाइक खरीदने की सोच रहे हैं, तो अब जरा सी लापरवाही आपको कानूनी मुश्किलों में डाल सकती है। दिल्ली पुलिस और ट्रांसपोर्ट विभाग ने सेकेंड-हैंड वाहन खरीदने वालों के लिए एक सख्त नियम लागू किया है।

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दिल्ली में पुरानी गाड़ी खरीदने के नियम Image Source : FREEPIK

अगर आप दिल्ली में पुरानी कार, बाइक या कोई भी गाड़ी खरीदने की प्लानिंग बना रहे हैं, तो अब जरा-सी लापरवाही भी आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकती है। राजधानी में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच दिल्ली पुलिस ने सेकेंड-हैंड वाहन खरीद-फरोख्त के नियमों को सख्त कर दिया है। अब पुराने वाहन खरीदने के बाद 15 दिन के भीतर पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC) अपने नाम ट्रांसफर कराना अनिवार्य होगा। तय समय में ऐसा नहीं करने पर सीधे पुलिस की कार्रवाई झेलनी पड़ सकती है।

दरअसल, यह सख्ती हाल ही में लालकिले के पास हुए कार धमाके की जांच के दौरान सामने आई गंभीर खामी के बाद की गई है। जांच में पता चला कि जिस कार का इस्तेमाल किया गया था, उसका आरसी अब भी पुराने मालिक के नाम पर दर्ज था। आरोपियों ने गाड़ी तो खरीद ली थी, लेकिन दस्तावेज अपने नाम ट्रांसफर नहीं कराए थे। नतीजा यह हुआ कि वाहन नंबर के आधार पर पुलिस जब मालिक तक पहुंची, तो जांच भटक गई और अहम सुराग मिलने में देरी हुई।

वाहन डीलरों को भी सख्त निर्देश

इसी अनुभव से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस ने न सिर्फ वाहन खरीदारों बल्कि पुराने वाहन डीलरों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। चूंकि दिल्ली में ज्यादातर सेकेंड-हैंड गाड़ियों की खरीद-फरोख्त डीलरों के माध्यम से होती है, इसलिए अब डीलरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। यदि सौदा होने के बाद आरसी ट्रांसफर नहीं कराया जाता है, तो संबंधित डीलर भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

खरीद-फरोख्त का पूरा विवरण रखें

पुलिस ने सभी पुराने वाहन डीलरों को निर्देश दिए हैं कि वे खरीद-फरोख्त का पूरा विवरण एक निर्धारित रजिस्टर में दर्ज रखें। इसमें वाहन बेचने वाले और खरीदने वाले दोनों की पूरी जानकारी शामिल होनी चाहिए। इसके साथ ही दिल्ली ट्रांसपोर्ट यूनिट और ट्रैफिक पुलिस को ऐसे मामलों पर कड़ी नजर रखने को कहा गया है, जहां आरसी समय पर ट्रांसफर नहीं कराई गई है।

सभी जिलों की पुलिस को भी अपने-अपने क्षेत्र में एक्टिव पुराने वाहन डीलरों की एक्टिविटी पर नियमित जानकारी जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए साफ कहा गया है कि रजिस्टर न रखने या आदेशों का पालन न करने पर डीलरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। गौरतलब है कि दिल्ली में कुल पंजीकृत वाहनों की संख्या करीब 1.22 करोड़ है। इनमें से 10 से 15 साल पुराने लाखों वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द किया जा चुका है, जबकि हर साल नए और पुराने वाहनों का रजिस्ट्रेशन लगातार जारी रहता है। ऐसे में पुलिस का मानना है कि आरसी ट्रांसफर को समयबद्ध और पारदर्शी बनाकर न सिर्फ अपराधों पर लगाम लगेगी, बल्कि निर्दोष लोगों को जांच की परेशानी से भी बचाया जा सकेगा।

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