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ई-मार्केटप्‍लेस के जरिये होगी अब सरकारी खरीदारी, तेल कंपनियां देंगी घरेलू कंपनियों को तरजीह

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Apr 12, 2017 08:46 pm IST,  Updated : Apr 12, 2017 08:48 pm IST

केंद्र एवं राज्य सरकार की इकाइयों द्वारा वस्तु एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए राष्ट्रीय पोर्टल के रूप में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्‍लेस बनाने का फैसला।

ई-मार्केटप्‍लेस के जरिये होगी अब सरकारी खरीदारी, तेल कंपनियां देंगी घरेलू कंपनियों को तरजीह- India TV Hindi
ई-मार्केटप्‍लेस के जरिये होगी अब सरकारी खरीदारी, तेल कंपनियां देंगी घरेलू कंपनियों को तरजीह

नई दिल्‍ली। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केंद्र एवं राज्य सरकार की इकाइयों  द्वारा वस्तु एवं सेवाओं की ऑनलाइन खरीद के लिए राष्ट्रीय पोर्टल के रूप में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्‍लेस बनाने का आज फैसला किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विशेष कंपनी गठित करने का फैसला किया जिसे राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के रूप में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्‍लेस (जीईएम एसपीवी) नाम से जाना जाएगा। यह कंपनी कानून के तहत पंजीकृत होगी। यह कंपनी केंद्रीय एवं राज्य सरकारों की इकाइयों को ऑनलाइन जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराएगी।

जीईएम एसपीवी केंद्र तथा राज्य सरकार के मंत्रालयों, विभागों, केंद्रीय एवं राज्य सरकार की इकाइयों, स्वायत्त निकायों तथा स्थानीय निकायों के लिए सामान्य उपयोग की वस्तु एवं सेवाओं की पारदर्शी और कुशल तरीके से खरीद हेतु ऑनलाइन मार्केटप्‍लेस होगा।

आधिकारिक बयान के अनुसार पूर्ति एवं निपटान महानिदेशालय (जीजीएस एंड डी) को समाप्त करने और उसके कामकाज को 31 अक्‍टूबर 2017 तक समेटने का भी फैसला किया गया है। इसमें कहा गया है कि अगर डीजीएस एंड डी को 31 अक्‍टूबर 2017 तक समाप्त नहीं किया जा सका तो विभाग यथोचित कारणों के आधार पर बंद करने की तारीख बढ़ाकर 31 मार्च 2018 तक कर सकता है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां खरीद में घरेलू कंपनियों को देंगी तरजीह 

वहीं एक अन्‍य फैसले में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के इरादे से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल एवं गैस कंपनियों की खरीद में घरेलू विनिर्माताओं को तरजीह देने से जुड़ी नीति को भी मंजूरी दी है।

नीति के तहत तेल एवं गैस कारोबार से जुड़ी कुछ गतिविधियों में स्थानीय सामान के उपयोग का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा। नीति के क्रियान्वयन पर नजर रखने के लिए एक निगरानी समिति गठित की जाएगी। समिति सालाना समीक्षा करेगी और साल-दर-साल के आधार पर नीति को जारी रखने की सिफारिश करेगी। नई नीति से देश में विनिर्माण को गति मिलने की उम्मीद है।

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