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CBI ने 1,000 करोड़ रुपए की कथित धोखाधड़ी में इंफ्रा कंपनी पर मुकदमा दर्ज किया

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Mar 12, 2019 10:27 pm IST,  Updated : Mar 12, 2019 10:27 pm IST

सीबीआई ने कैनरा बैंक की अगुआई वाले कर्जदाताओं के समूह को 1000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में रांची एक्सप्रेसवे लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के श्रीनिवास राव समेत कंपनी के प्रवर्तकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

CBI books infra firm for alleged cheating to the tune of Rs 1000 crore- India TV Hindi
CBI books infra firm for alleged cheating to the tune of Rs 1000 crore

नयी दिल्ली: केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने कैनरा बैंक की अगुआई वाले कर्जदाताओं के समूह को 1000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने के आरोप में रांची एक्सप्रेसवे लिमिटेड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक के श्रीनिवास राव समेत कंपनी के प्रवर्तकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सीबीआई ने रांची एक्सप्रेसवे लिमिटेड के सीएमडी के श्रीनिवास राव , कंपनी के निदेशकों एन सीतैया , एन पृथ्वी तेजा और कंपनी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इसके अलावा मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड , मधुकॉन इंफ्रा , मधुकॉन टोल हाईवे लिमिटेड और ऑडिट फर्म ' कोटा एंड कंपनी ' का नाम भी प्राथमिकी में शामिल है।

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बैंकों के समूह के अज्ञात अधिकारियों के खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज की गई है। यह मामला रांची से जमशेदपुर को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग -33 पर 163 किलोमीटर लंबे मार्ग को चार लेन बनाने से जुड़ा है। इसके निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मधुकॉन प्रोजेक्ट लिमिटेड का 18 मार्च 2011 को चुना था।

अधिकारियों ने कहा कि परियोजना के लिए विशेष कंपनी रांची एक्सप्रेस - वे लिमिटेड की स्थापना की गई। यह परियोजना डिजाइन , निर्माण , वित्तपोषण , परिचालन और स्थानांतरण मॉडल पर आधारित थी। उन्होंने कहा कि परियोजना की अनुमानित लागत 1,655 करोड़ रुपये थी। इसके लिए कैनरा बैंक की अगुआई वाले 15 बैंकों का समूह 1151.60 करोड़ रुपये का कर्ज देने पर सहमति जताई थी जबकि प्रवर्तकों को 503.60 करोड़ रुपये देने थे।

अधिकारियों ने कहा कि गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक रांची एक्सप्रेसवे के प्रवर्तक-निदेशकों श्री निवास राव, एन सीतैया और एन पृथ्वी तेजा ने कुल 264.01 करोड़ रुपये की पूंजी गड़बड़ी की। अधिकारियों ने कहा कि निदेशकों पर आरोप है कि उन्होंने बैंकों के समूह से 1,029.39 रुपये की पूंजी प्राप्त करने के लिए धोखाधड़ी की लेकिन परियोजना में कोई प्रगति नहीं हुई और ऋण 2018 में गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में तब्दील हो गया।

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