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घरेलू कालाधन का खुलासा करने के लिए फॉर्म हुए नोटिफाई, टैक्‍स और जुर्माना देकर बनें ईमानदार

 Written By: Abhishek Shrivastava
 Published : Jun 02, 2016 04:00 pm IST,  Updated : Jun 02, 2016 04:01 pm IST

आयकर विभाग ने घरेलू कालाधन अनुपालन खिड़की सुविधा के लिए चार नए फॉर्म नोटिफाई किए हैं, जिससे अघोषित संपत्ति पर टैक्‍स एवं जुर्माना भरकर पाक साफ हो सकते हैं।

घरेलू कालाधन का खुलासा करने के लिए फॉर्म हुए नोटिफाई, टैक्‍स और जुर्माना देकर छवि सुधारने का मौका- India TV Hindi
घरेलू कालाधन का खुलासा करने के लिए फॉर्म हुए नोटिफाई, टैक्‍स और जुर्माना देकर छवि सुधारने का मौका

नई दिल्ली। आयकर विभाग ने इस महीने से शुरू हुई घरेलू कालाधन अनुपालन खिड़की सुविधा के लिए चार नए फॉर्म नोटिफाई किए हैं। सरकार की तरफ से दी गई इस एकबारगी सुविधा के तहत लोग अपनी अघोषित संपत्ति पर टैक्‍स एवं जुर्माना चुकाकर अपनी स्थिति पाक साफ कर सकते हैं।

आय घोषणा योजना के तहत फॉर्म-1,2,3 और4- का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक वरिष्ठ सूचना प्रौद्योगिकी अधिकारी ने इस बारे में कहा, फॉर्म-1 में आईडीएस के तहत परिसंपत्ति का ब्योरा देने के लिए है, जबकि फॉर्म-2 के तहत इसकी प्राप्ति होगी। इसे क्षेत्र के प्रधान आयकर आयुक्त द्वारा जारी किया जाएगा। इसके साथ ही फॉर्म-3 और 4 ऐसे कोषों पर टैक्‍स और जुर्माने के भुगतान से जुड़े हैं। ये फॉर्म आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर अपलोड कर दिए गए हैं। चार महीने की यह आयकर घोषणा योजना एक जून से शुरू हो चुकी है और 30 सितंबर तक खुली रहेगी। इस योजना के तहत की गई संपत्ति की घोषणा पर पात्र व्यक्ति को 45 फीसदी की दर से टैक्‍स देना होगा। इसमें 30 फीसदी टैक्‍स इसके अलावा देय टैक्‍स पर 25 फीसदी की दर से कृषि कल्याण उपकर तथा 25 फीसदी जुर्माना शामिल है। टैक्‍स का भुगतान 30 नवंबर तक किया जाना है।

इस योजना की घोषणा सरकार ने घरेलू अर्थव्यवस्था से कालाधान निकालने के लिए इस साल के बजट में की थी। इससे पहले सरकार विदेश में अघोषित परिसंपत्ति रखने वालों के लिए भी ऐसी ही योजना लेकर आई थी। योजना के तहत 2015-16 या इससे पहले की ऐसी अघोषित आय की घोषणा की जा सकती है, जो कि संपत्ति में निवेश अथवा अन्य प्रकार से है। आईडीएस के तहत खुलासा या ता आयकर विभाग की आधिकारिक ई-फाइलिंग वेबसाइट पर ऑनलाइन किया जा सकता है या फिर देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रधान आयकर आयुक्त के समक्ष किया जा सकता है।

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