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भारत और ईरान को व्यापार बढ़ाने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए, बासमती पर आयात शुल्क घटाकर 20% करने की मांग

 Written By: Dharmender Chaudhary
 Published : Mar 12, 2017 04:39 pm IST,  Updated : Mar 12, 2017 04:39 pm IST

निर्यातकों के प्रमुख संगठन फियो ने कहा है कि भारत और ईरान के बीच व्यापार बढ़ाने के लिए कृषिं जिंसों पर शुल्कों को तर्कसंगत करने की जरूरत है।

भारत और ईरान को व्यापार बढ़ाने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए, बासमती पर आयात शुल्क घटाकर 20% करने की मांग- India TV Hindi
भारत और ईरान को व्यापार बढ़ाने के लिए तेजी से कदम उठाने चाहिए, बासमती पर आयात शुल्क घटाकर 20% करने की मांग

नई दिल्ली। भारत और ईरान को द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने के लिए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। निर्यातकों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (फियो) ने कहा है कि दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने को बैंकिंग क्षेत्र में आपसी सहयोग के साथ कृषिं जिंसों पर शुल्कों को तर्कसंगत करने की जरूरत है।

फियो ने ईरान द्वारा बासमती चावल पर आयात शुल्क में भारी कटौती की जरूरत बताई है…

फियो के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा, हमारे बासमती चावल पर आयात शुल्क 45 प्रतिशत है। ईरान को इसे घटाकर 20 प्रतिशत करना चाहिए। भारत से बासमती चावल का निर्यात बढ़ाने की जरूरत है। हमने ईरान से शुल्क में कटौती की मांग की है।

  • ईरान का चावल उत्पादन 20 चावल है, जबकि वहां मांग 30 लाख टन की है। वह मुख्य रूप से भारत और पाकिस्तान से चावल का आयात करता है।
  • सहाय ने रिजर्व बैंक से आग्रह किया कि वह ईरान के बैंकों को भारत में शाखाएं खोलने की अनुमति प्रदान करें। इससे द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी।

भारत से ईरान व तुर्की तक मालगाड़ी सेवा का विचार

  • रेलवे भारत से ईरान व तुर्की को जोड़ने वाली अंतरमहाद्वीपीय माल ढुलाई रेल सेवा शुरू करने की संभावना टटोल रही है।
  • इस रेलवे मालढुलाई मार्ग को एशिया प्रशांत क्षेत्र में व्यापार और आर्थिक विकास के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
  • यह माल ढुलाई मार्ग ढाका से इस्तांबुल तक होगा।
  • यह माल ढुलाई सेवा बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान व तुर्की को जोड़ेगी।
  • भारतीय रेल ने इस बारे में 15-16 मार्च को दक्षिण एशियाई देशों के रेल प्रमुखों की एक बैठक बुलाई है।
  • रेलवे सूत्रों का कहना है कि इस बारे में कई अध्ययन हो चुके हैं।
  • भूटान व अफगानिस्तान में रेल नेटवर्क नहीं है।
  • इन्हें निकटवर्ती स्टेशनों से सड़क संपर्क के जरिए परियोजना में शामिल किया जा सकता है।
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