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US से 'दुश्मनी' में ईरान ने भारत पर लगाई शर्तें, तेल बकाए का भुगतान यूरो में करने को कहा

 Published : Feb 07, 2016 02:45 pm IST,  Updated : Feb 07, 2016 08:27 pm IST

ईरान ने भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों एस्सार ऑयल और एमआरपीएल से उसके कच्चे तेल के बकाए का भुगतान छह महीने में यूरो में करने को कहा है।

US से ‘दुश्मनी’ में ईरान ने भारत पर लगाई शर्तें, तेल बकाए का भुगतान यूरो में करने को कहा- India TV Hindi
US से ‘दुश्मनी’ में ईरान ने भारत पर लगाई शर्तें, तेल बकाए का भुगतान यूरो में करने को कहा

नई दिल्ली। ईरान ने भारतीय तेल रिफाइनरी कंपनियों एस्सार ऑयल और मेंगूलर रिफाइनरी एंड पैट्रोकैमिकल्स लि. (एमआरपीएल) से उसके कच्चे तेल के बकाए का भुगतान छह महीने में यूरो में करने को कहा है। यह बकाया करीब छह अरब डॉलर बैठता है। अमेरिका द्वारा ईरान से प्रतिबंध हटाए जाने के बाद तीन साल पुरानी व्यवस्था समाप्त हो गई है। इसके तहत आयात बिल के कुल का 45 फीसदी रुपए में भुगतान किया जाता था और शेष 55 फीसदी राशि भुगतान चैनलों के माध्यम से भुगतान के लिए लंबित रखी जाती है।

छह महीने छह अरब डॉलर चुकाने को कहा

मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि लंबित भुगतान छह अरब डॉलर से अधिक का है और ईरान इसे अगले छह महीने में किस्तों में लेने पर सहमत हुआ है। ईरान के केंद्रीय बैंक के गवर्नर घोलामली कामयाब ने भारतीय अधिकारियों को सूचित किया है कि कच्चे तेल का भुगतान अब ईरान को यूरो में किया जाए, क्योंकि वह अमेरिकी वित्तीय प्रणाली के जरिए अमेरिकी डॉलर में निपटान नहीं ले सकता। ईरान भारतीय बैंकों के साथ यूरो खातों को फिर खोलेगा या सक्रिय करेगा। वह चाहता है कि रिफाइनरी कंपनियों से धन इन खातों में स्थानांतरित किया जाए।

अधिकारी एक तंत्र विकसित करने में जुटे

भारत सरकार के एक सूत्र ने बताया कि अधिकारी एक तंत्र विकसित करने में जुटे हैं जिसके तहत ईरान के पेमेंट से जुड़े मुद्दों को यूनाइटेड कॉमर्शल बैंक (यूसीओ) और आईडीबीआई बैंक हैंडल करें। यूसीओ के सीईओ आर. के. टक्कर ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि बैंक ईरान को किए जाने वाले पेमेंट के मसले से जुड़ा है। वहीं, आईडीबीआई के सीईओ किशोर खराट से संपर्क नहीं हो सका। भारत तुर्की के हॉल्कबैंक के जरिए पेमेंट की प्रक्रिया फिर से बहाल करने पर भी विचार कर रहा है जो 2012 के बाद से बंद पड़ी है। साथ ही ग्लोबल एसडब्ल्यूआईएफटी ट्रेंसैक्शन नेटवर्क के जरिए ईरान के बैंकों को डायरेक्ट ट्रांसफर का विकल्प भी तलाशा जा रहा है।

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