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नई दिल्ली। वेतन कटौती और विभिन्न विभागों में नौकरियों में कटौती की संभावनाओं को लेकर जेट एयरवेज के पायलट और प्रबंधन के बीच विवाद जारी है। जेट एयरवेज ने कर्मचारियों से कहा है उसके लिये कंपनी को दो महीने से ज्यादा चला पाना मुमकिन नहीं है। पायलट समुदाय में मौजूद सूत्रों ने यह जानकारी दी। हालांकि, जेट एयरवेज ने 60 दिन से आगे एयरलाइन का कामकाज जारी नहीं रह पाने संबंधी खबरों को "गलत और दुर्भावनापूर्ण" बताया और हिस्सेदारी बेचने के लिये बातचीत की खबरों को भी खारिज किया।
सूत्रों ने कहा कि जेट एयरवेज ने कर्मचारियों को बताया कि कैप्टन के लिये एक वर्ष का नोटिस पीरियड भी खत्म कर दिया जायेगा। वर्तमान में जेट एयरवेज में 16,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं। विमानन कंपनी ने कहा कि वह लागत को कम करने के लिये जरूरी कदम उठा रही है। पायलट सुमदाय के सूत्रों ने बताया कि इस हफ्ते की शुरूआत में कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के साथ पायलट समेत अन्य कर्मचारियों की बैठक हुयी थी। इसमें उन्हें बताया कि जेट एयरवेज की वित्तीय हालत खराब है और लागत को कम करने के लिये उनका सहयोग मांगा गया। प्रस्तावित कदमों में वेतन कटौती भी शामिल है।
इस बैठक में जेट एयरवेज के चेयरमैन नरेश गोयल, सीईओ विनय दुबे और डिप्टी सीईओ अमित अग्रवाल समेत अन्य लोग मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार, प्रबंधन ने बैठक में कहा कि अगर लागत को कम करने के लिये कदम नहीं उठाये गये तो कंपनी के पास 60 दिनों से ज्यादा समय तक परिचालन करने के लिये पैसा नहीं है।
जेट एयरवेज ने बंबई शेयर बाजार को बताया कि लागत को कम करने के साथ-साथ अधिक राजस्व के लिये कुछ कदम उठाये जा रहे हैं। जेट एयरवेज ने यह जानकारी बंबई शेयर बाजार द्वारा मीडिया में आई खबरों पर स्पष्टीकरण के जवाब में दी है। खबरों में कहा गया था कि विमानन कंपनी के लिये 60 दिन से ज्यादा परिचालन करना संभव नहीं है।



































