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नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का पहले साल सौर उपकरणों पर 25% तक सीमा शुल्क का प्रस्ताव: ऊर्जा मंत्री

Edited by: India TV Paisa Desk Published : Jun 25, 2020 04:39 pm IST, Updated : Jun 25, 2020 04:39 pm IST

बाद में सीमा शुल्क को बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का प्रस्ताव

custom duty on solar equipment - India TV Paisa
Photo:AP

custom duty on solar equipment 

नई दिल्ली। ऊर्जा मंत्री आर के सिंह ने बृहस्पतिवार को कहा कि नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने पहले साल सौर उपकरणों पर 15 से 25 प्रतिशत का मूल सीमा शुल्क (बीसीडी) लगाने का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि बाद में इस शुल्क को बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा। केंद्रीय मंत्री ने बिजली क्षेत्र के सुधारों का विरोध करने वालों को भी आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि बिजली क्षेत्र के विकास और कंपनियों के क्षेत्र में बने रहने के लिये ये सुधार जरूरी हैं। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभाल रहे सिंह ने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मंत्रालय ने सौर मॉड्यूल्स पर 20 से 25 प्रतिशत का बीसीडी लगाने का प्रस्ताव किया है। इसे दूसरे साल बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाएगा।’’

इससे पहले उन्होंने मंगलवार को उद्योग प्रतिनिधियों के साथ बातचीत में एमएनआरई द्वारा सौर सेल, मॉड्यूल्स और इन्वर्टर पर इस साल अगस्त से बीसीडी लगाने के प्रस्ताव की जानकारी दी थी। सिंह के अनुसार इसके अलावा मंत्रालय ने सौर सेल पर पहले साल 10 से 15 प्रतिशत बीसीडी लगाने का प्रस्ताव किया है। दूसरे साल से यह शुल्क 40 प्रतिशत हो जाएगा। अभी सौर उपकरणों पर कोई मूल सीमा शुल्क नहीं लगता। हालांकि, सौर सेल पर 15 प्रतिशत का सेफगार्ड ड्यूटी (एसजीडी) लगाया जाता है, जो 30 जुलाई, 2020 से शून्य हो जाएगा। जुलाई 2018 में भारत ने चीन और मलेशिया से सौर सेल के आयात पर दो साल के लिए एसजीडी लगाया था। घरेलू कंपनियों को संरक्षण के लिए यह कदम उठाया गया था।

सरकार ने 30 जुलाई, 2018 से 29 जुलाई, 2019 के लिए 25 प्रतिशत का एसजीडी लगाया था, जो 30 जुलाई, 2019 से 29 जनवरी, 2020 तक घटकर 20 प्रतिशत पर आ गया। 30 जनवरी, 2020 से 29 जुलाई, 2020 के दौरान यह 15 प्रतिशत है। संवाददाता सम्मेलन के दौरान मंत्री ने बिजली क्षेत्र के सुधारों का विरोध करने वाली विभिन्न ‘लॉबी’ को आड़े हाथ लिया। इनमें संशोधित बिजली शुल्क नीति तथा हाल में जारी बिजली संशोधन विधेयक को मसौदा शामिल है। उन्होंने कहा कि संशोधन को लेकर कुछ लोग राज्य सरकारों के अधिकार कम हाने की झूठी बातें फैला रहे हैं जिनका कोई आधार नहीं है। मंत्री ने कहा कि बिजली क्षेत्र खासकर वितरण कंपनियों को टिकाऊ बने रहने के लिये इन सुधारों की जरूरत है।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पिछले महीने बिजली वितरण कंपनियों के लिए घोषित 90,000 करोड़ रुपये के नकदी पैकेज के बारे में सिंह ने कहा कि विभिन्न राज्यों ने इस पैकेज के तहत अपनी बिजली वितरण कंपनियों के लिए 93,000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने में रुचि दिखाई है। केंद्र शासित प्रदेशों में वितरण कंपनियों के निजीकरण के बारे में मंत्री ने कहा कि योजना पर काम जारी है। कुछ तापीय बिजली संयंत्रों में उत्सर्जन को काबू में करने के लिये उपकरण लगाये जाने की समयसीमा का पालन नहीं कये जाने के बारे में मंत्री ने कहा कि उन्हें अपने बिजलीघर बंद करने होंगे।

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