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ईरान-इजरायल जंग के बीच OPEC+ ने खोला खजाना; हर दिन करेगा 2 लाख बैरल ज्यादा तेल की सप्लाई

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Mar 01, 2026 08:18 pm IST,  Updated : Mar 01, 2026 08:18 pm IST

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की तेजी से बढ़ती कीमतों के बीच दुनिया के लिए एक राहत की खबर आई है। रविवार को हुई एक अहम बैठक में तेल उत्पादक देशों के समूह OPEC+ ने बड़ा फैसला लिया।

मिडिल ईस्ट संकट पर OPEC+...- India TV Hindi
मिडिल ईस्ट संकट पर OPEC+ का मास्टरस्ट्रोक Image Source : CANVA

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच दुनिया के लिए एक राहत भरी खबर आई है। रविवार को हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में तेल निर्यातक देशों के संगठन OPEC+ ने अपनी उत्पादन नीति में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य संघर्ष और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की सप्लाई रुकने के खतरे को देखते हुए OPEC+ अब अप्रैल महीने से हर दिन 2,06,000 बैरल एक्स्ट्रा कच्चा तेल बाजार में उतारेगा।

क्यों लिया गया यह अचानक फैसला?

28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से ही वैश्विक बाजार में हड़कंप मच गया था। ब्रेंट क्रूड की कीमतें में भारी उछाल की संभावना जताई जा रही थी। ऐसे में सऊदी अरब और रूस के नेतृत्व वाले स्वैच्छिक आठ (V8) देशों के समूह ने बाजार में स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया है। इस समूह में सऊदी अरब, रूस, इराक, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कुवैत, कजाकिस्तान, अल्जीरिया और ओमान शामिल हैं। इनका मानना है कि एक्स्ट्रा सप्लाई से तेल की कीमतों को एक सीमित दायरे में रखा जा सकेगा।

बाजार की स्थिरता के लिए कौशस अप्रोच

OPEC+ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि वे बाजार की स्थितियों पर लगातार और बारीकी से नजर रख रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का अनुमान था कि उत्पादन में केवल 1,37,000 बैरल की बढ़ोतरी होगी, लेकिन संगठन ने 2,06,000 बैरल का आंकड़ा चुनकर सबको चौंका दिया है। बयान के अनुसार, वैश्विक स्तर पर तेल के घटते स्टॉक और बढ़ती मांग को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। संगठन ने साफ किया है कि जरूरत पड़ने पर इस उत्पादन दर को बढ़ाया या घटाया जा सकता है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित संकट से निपटा जा सके।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है। OPEC+ के इस फैसले से भारतीय बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर लगाम लग सकती है। हालांकि, असली चुनौती अब भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा है। अगर युद्ध के कारण यह समुद्री रास्ता बंद होता है, तो 2 लाख बैरल की अतिरिक्त सप्लाई भी नाकाफी साबित हो सकती है, क्योंकि दुनिया का 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है।

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