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सरकार एनपीए से ‘मजबूर’ बैंकों को ‘मजबूत’ बैंक बना रही है, किसी उद्योगपति का कर्ज नहीं किया माफ : जेटली

 Written By: Manish Mishra
 Published : Nov 29, 2017 09:33 am IST,  Updated : Nov 29, 2017 10:15 am IST

वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह पूछा जाना चाहिए कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2008 से 2014 के बीच किसके कहने पर वे कर्ज दिए जो आज एनपीए बन गए हैं।

सरकार एनपीए से ‘मजबूर’ बैंकों को ‘मजबूत’ बैंक बना रही है, किसी उद्योगपति का कर्ज नहीं किया माफ : जेटली- India TV Hindi
सरकार एनपीए से ‘मजबूर’ बैंकों को ‘मजबूत’ बैंक बना रही है, किसी उद्योगपति का कर्ज नहीं किया माफ : जेटली

नई दिल्ली वित्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जाने की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वालों के खिलाफ सरकार कड़े कदम उठा रही है और नई पूंजी उपलब्ध कराकर अब तक मजबूर रहे बैंकों को अब मजबूत बैंक बनाने में लगी है। जेटली ने कहा कि सरकार ने बैंकों से कर्ज लेकर उसे नहीं लौटाने किसी भी बड़े डिफॉल्टर का कोई कर्ज माफ नहीं किया है।

उन्होंने इस पर खेद जताया कि पिछले कुछ दिनों से ऐसी अफवाहें फैलाई जा रही है कि बैंकों ने बड़े पूंजीपतियों के कर्ज माफ किए हैं। इस तरह की अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए वित्‍त मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि देश के सामने इसकी जानकारी आए। यह पूछा जाना चाहिए कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने 2008 से 2014 के बीच किसके कहने पर वे कर्ज दिए जो आज एनपीए बन गए हैं।

जेटली ने आगे कहा कि अफवाहें फैलाने वालों से जनता को पूछना चाहिउ कि किसके कहने पर और किसके दबाव में ये कर्ज वितरित किए गए। उनसे यह भी पूछा जाना चाहिए कि जब इन कर्ज लेनदारों ने बैंको को कर्ज और ब्याज का भुगतान करने में देरी की तो तत्कालीन सरकार ने क्या फैसला किया और क्या कदम उठाए।

उन्होंने कहा कि समय पर कर्ज नहीं लौटाने वालों के खिलाफ कड़े कदम उठाने के बजाय उस समय की सरकार ने कर्ज वर्गीकरण के नियमों में ही राहत दे दी ताकि उनके ऋण खातों को एनपीए खातों में जाने से बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने जब संपत्ति गुणवत्‍ता की समीक्षा की तो 4.54 लाख करोड़ रुपए के कर्ज जिन्हें वास्तव में एनपीए होना चाहिए था उन्हें एनपीए होने से छिपाए रखा गया और बाद में इनकी पहचान हुई।

वित्‍त मंत्री ने जोर देकर कहा कि सरकार ने बैंकों का कर्ज नहीं लौटाने वाले किसी भी बड़े कर्जदार का ऋण माफ नहीं किया है। उन्होंने आंकड़ों के साथ आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकार (कांग्रेस नीत संप्रग सरकार) के कार्यकाल में बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को छिपाया गया। एनपीए की सही पहचान से यह स्पष्ट हुआ है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए मार्च 2015 के 2,78,000 करोड़ रुपए से बढ़कर जून 2017 में 7,33,000 करोड़ रुपया हो गया।

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