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17 जून से 26 जुलाई तक चलेगा संसद सत्र, पांच जुलाई को पेश होगा पूर्ण बजट, यहां जानिए क्या कुछ होगा खास

देश में नवनिर्वाचित 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से आरंभ होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया है।

India TV Business Desk India TV Business Desk
Updated on: June 02, 2019 11:30 IST
parliament new session to be start on 17 june and Modi Government Will Present union Budget On July - India TV Paisa

parliament new session to be start on 17 june and Modi Government Will Present union Budget On July 5th

नई दिल्ली। देश में नवनिर्वाचित 17वीं लोकसभा का पहला सत्र 17 जून से आरंभ होगा। पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हो गया है और 17 जून से संसद का नया सत्र शुरू होगा। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला बजट पांच जुलाई को संसद में पेश होगा। नवनियुक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट लोकसभा में पेश करेंगी। साथ ही वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर भी होंगे। आर्थिक सर्वेक्षण संसद में चार जुलाई को पेश किया जाएगा। आर्थिक सर्वेक्षण में देश की अर्थव्यवस्था की तस्वीर पेश की जाती है। इसके एक दिन बाद वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण संसद में पूर्ण बजट पेश करेंगी। अब आम बजट में ही रेल बजट को शामिल कर लिया गया है।

40 दिन चलेगा संसद सत्र, 30 बैठकें होंगी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपनी पहली बैठक में 17वीं लोकसभा का बजट सत्र सोमवार 17 जून से बुलाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। यह सत्र शु्क्रवार 26 जुलाई 2019 तक चलेगा। राज्यसभा का सत्र 20 जून को शुरू होगा और 26 जुलाई तक चलेगा। वित्त वर्ष 2019-20 का पूर्ण बजट पांच जुलाई को सुबह 11 बजे नवनियुक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पेश करेंगी। नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि संसद का यह सत्र 40 दिनों तक चलेगा और और इसमें 30 बैठकें होंगी। उन्होंने बताया कि संसद सत्र के पहले दो दिनों के दौरान नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई जाएगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 20 जून को लोकसभा और राज्यसभा के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करेंगे जिसके बाद उनके संबोधन पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा होगी। 

क्या होता है पूर्ण बजट

नई सरकार बनने के बाद सालभर के खर्चों का लेखा-जोखा जारी किया जाता है। इसे ही पूर्ण बजट कहते हैं। इसके जरिए सरकार की प्राप्तियों (इनकम) और खर्च का ब्योरा सरकार पेश करती हैं। इसके अलावा यह पूरे साल के लिए होता है। पूर्ण बजट में आंकड़ों के जरिए सरकार संसद को बताती है कि वो आने वाले वित्त वर्ष में किस चीज पर कितना पैसा खर्च करने वाली है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जुलाई में पेश होने वाले फुल बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं होगा। रेवेन्यू कलेक्शन में कमी इसकी वजह बनी है। बजट के बाद डायरेक्ट टैक्स पर टास्क फोर्स की रिपोर्ट आएगी। डायरेक्ट टैक्स में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा।

फरवरी में चालू वित्त वर्ष का अंतरिम बजट तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने किया था पेश 

आम चुनावों के मद्देनजर चालू वित्त वर्ष का अंतरिम बजट फरवरी में तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने पेश किया था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बाद निर्मला सीतारमण पहली महिला वित्तमंत्री होंगी, जो संसद में बजट पेश करेंगी। मोदी सरकार ने अपने पूर्व कार्यकाल में एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश किया था क्योंकि आगे लोकसभा चुनाव आने वाला था। पहले पूर्ण बजट में लेखानुदान में की गई विभिन्न घोषणाओं के संबंध में देखा जाएगा कि उन्हें या तो लागू किया जाएगा या आगे बढ़ाया जाएगा।

अंतरिम बजट और पूर्ण बजट में क्या होता है अंतर 

आम बजट पूरे वित्त वर्ष के लिए पेश किया जाता है, जबकि अंतरिम बजट कुछ ही महीनों के लिए पेश किया जाता है। अंतरिम बजट के कुछ महीनों बाद नई सरकार की ओर से उसी वर्ष पूर्ण बजट भी पेश किया जाता है।

टैक्स स्लैब पर रहेगी नजर

मोदी सरकार के इस पूर्ण बजट में टैक्स स्लैब पर नजर रहेगी। हालांकि, वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक जुलाई में पेश होने वाले फुल बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं होगा। रेवेन्यू कलेक्शन में कमी इसकी वजह बनी है। बजट के बाद डायरेक्ट टैक्स पर टास्क फोर्स की रिपोर्ट आएगी। डायरेक्ट टैक्स में फिलहाल बदलाव नहीं किया जाएगा। लोकसभा चुनावों से पहले अंतरिम बजट पेश करते हुए तत्कालीन वित्त मंत्री पीयूष गोयल ने 5 लाख तक की सालाना कमाई करने वाले नौकरी पेशा को टैक्‍स फ्री करने का ऐलान किया था, लेकिन स्‍लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ था। कहने का मतलब यह है कि अंतरिम बजट में 5 लाख तक की सालाना कमाई करने वालों को टैक्‍स देने के झंझट से मुक्‍त किया गया था। वहीं इससे अधिक कमाई वाले नौकरीपेशा को पुराने टैक्‍स स्‍लैब के तहत टैक्‍स देना होगा।

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