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भारतीय निवेशकों ने खोजा निवेश का नया ठिकाना- अब सिर्फ घरेलू शेयर, ETF ही नहीं, यहां भी जमकर लगा रहे पैसा

रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एजुकेशन तक जबरदस्त पहुंच ने इस बदलाव को आकार देने में बहुत बड़ी और अहम भूमिका निभाई है।

Edited By: Sunil Chaurasia
Published : Dec 16, 2025 05:40 pm IST, Updated : Dec 16, 2025 05:40 pm IST
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Photo:FREEPIK वेस्टेड फाइनेंस की ताजा रिपोर्ट में सामने आई भारतीय निवेशकों की इंवेस्टमेंट प्लानिंग

भारतीय निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को जबरदस्त तरीके से एक्सपेंड और डायवर्सिफाई कर रहे हैं। अगर आप ये सोच रहे हैं कि भारतीय निवेशक अभी भी सिर्फ बैंक एफडी, घरेलू इक्विटी, गोल्ड-सिल्वर, ईटीएफ, बॉन्ड में पैसा लगा रहे हैं तो आप बिल्कुल गलत हैं। जी हां, भारतीय निवेशक अब भारत से बाहर निकलकर विदेशी बाजारों में भी जमकर पैसा लगा रहे हैं। घरेलू निवेशक अब सिर्फ एक-दो शेयर बाजारों में निवेश तक सीमित न रहते हुए अमेरिकी इक्विटी, इंडेक्स और सेक्टर आधारित ईटीएफ, प्राइवेट मार्केट के मौकों सहित विदेशी बाजारों में अपना निवेश लगातार बढ़ा रहे हैं। 

वेस्टेड फाइनेंस की ताजा रिपोर्ट में सामने आई भारतीय निवेशकों की इंवेस्टमेंट प्लानिंग

वेस्टेड फाइनेंस की ‘हाउ इंडिया इन्वेस्ट्स ग्लोबली 2025’ टाइटल वाली रिपोर्ट में ये जानकारी सामने आई है। इससे, भारतीय निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो बनाने के लिए ज्यादा सुनियोजित तरीका और ग्लोबल बाजार में हिस्सेदारी को लेकर बढ़ते भरोसे का पता चलता है। रिपोर्ट के मुताबिक रिसर्च, डिजिटल प्लेटफॉर्म और एजुकेशन तक जबरदस्त पहुंच ने इस बदलाव को आकार देने में बहुत बड़ी और अहम भूमिका निभाई है। दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों से बाहर के शहरों में खासतौर पर ऐसा देखा जा रहा है।

आखिर घरेलू बाजार के होते हुए विदेशी बाजार की तरफ क्यों रुख कर रहे हैं भारतीय निवेशक

इसके अलावा, भारतीय मुद्रा में जारी भारी-भरकम गिरावट ने भी घरेलू निवेशकों को ग्लोबल इंवेस्टमेंट की तरफ रुख करने के लिए मजबूर किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रुपये में लगातार जारी गिरावट लॉन्ग टर्म के नतीजों को प्रभावित करता है। रिपोर्ट में कहा गया कि विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश वित्त वर्ष 2018-19 में 42.2 करोड़ अमेरिकी डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। इस तरह इसमें चार गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं दूसरी ओर, भारतीय शेयर बाजार लगातार सुस्त बना हुआ है। विदेशी निवेशक रुपये की कमजोरी को ध्यान में रखते हुए भारतीय बाजार से लगातार निकासी कर रहे हैं। 

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