नागर विमानन मंत्रालय एयरलाइन कंपनियों पर पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए कई विकल्प तलाश रहा है। इसमें एक विकल्प राज्य सरकारों के साथ मिलकर विमान ईंधन (ATF) पर लगाए जाने वाले टैक्स को कम करना है। पश्चिम एशिया संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ था। उसके बाद हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंधों के चलते एयरलाइन कंपनियों की परिचालन लागत बढ़ गई है। एक उच्चस्तरीय सूत्र ने कहा कि मंत्रालय बड़े प्रयासों के हिस्से के रूप में एयरलाइंस पर पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रभाव को कम करने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है।
के. राममोहन नायडू ने राज्य सरकारों के साथ शुरू की बातचीत
नागर विमानन मंत्री के. राममोहन नायडू और मंत्रालय ने जेट ईंधन पर टैक्स कम करने की संभावना को लेकर मुख्यमंत्रियों और राज्य सरकारों के साथ चर्चाएं शुरू की हैं। एयरलाइन की कुल परिचालन लागत में एटीएफ का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत होता है। विभिन्न राज्यों में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) पर अलग-अलग वैट होता है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में एटीएफ पर वैट 25 प्रतिशत है जबकि पड़ोसी उत्तर प्रदेश में ये सिर्फ 1 प्रतिशत है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव की वजह से एयरलाइन कंपनियों ने ऐसे देशों के लिए अपनी सर्विस को भी कम कर दिया है, जहां जाने के लिए उन्हें लंबे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटाया
तेल की बढ़ती कीमतों के बीच, सरकार ने इस सप्ताह पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क घटा दिया है। डीजल और एटीएफ के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क बढ़ा दिया गया है। ये कदम उनकी घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से लिया गया है। एक उच्च पदस्थ सूत्र के अनुसार, नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) अन्य देशों के समकक्षों के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति को लेकर संपर्क में है। डीजीसीए के प्रमुख फैज अहमद किदवई ने 26 मार्च को कहा था कि एयरलाइन कंपनियों को बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और उनके संचालन की लागत बढ़ रही है। उन्होंने आगे स्थिति में सुधार की उम्मीद जताई थी।