अगर आपका लोन बैंक ऑफ बड़ौदा या केनरा बैंक से चल रहा है या आप इन बैंकों से नया कर्ज लेने की तैयारी कर रहे हैं, तो यह खबर आपके लिए जरूरी है। दोनों सरकारी बैंकों ने कुछ अवधि के लिए MCLR (मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट) में बढ़ोतरी की है। नई दरें 12 अगस्त 2026 से लागू हो गई हैं। ऐसे में MCLR से जुड़े लोन की ब्याज दर और EMI पर असर पड़ सकता है।
यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारतीय रिजर्व बैंक ने 5 अगस्त 2026 को हुई मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रखा था। इसके करीब एक हफ्ते बाद दोनों बैंकों ने चुनिंदा अवधि के MCLR में बदलाव किया है।
केनरा बैंक ने 5 बेसिस पॉइंट बढ़ाया MCLR
केनरा बैंक ने चुनिंदा अवधि के MCLR में 5 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की है। एक बेसिस पॉइंट 0.01 प्रतिशत के बराबर होता है। बैंक का नया MCLR अलग-अलग अवधि के हिसाब से 7.95% से 9.10% के बीच है। ओवरनाइट MCLR 7.95% पर पहले की तरह बरकरार है। वहीं, एक महीने का MCLR 8% से बढ़कर 8.05%, तीन महीने का 8.25% से बढ़कर 8.30% और छह महीने का 8.60% से बढ़कर 8.65% हो गया है। एक साल का MCLR भी 8.75% से बढ़कर 8.80% हो गया है। इसके अलावा दो साल और तीन साल की MCLR दरें बढ़कर क्रमशः 9.05% और 9.10% हो गई हैं।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने 10 बेसिस पॉइंट तक बढ़ाया MCLR
बैंक ऑफ बड़ौदा ने भी चुनिंदा अवधि के लिए MCLR में बढ़ोतरी की है। बैंक ने तीन महीने की MCLR को 10 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.20% से 8.30% कर दिया है। हालांकि, बैंक ने ओवरनाइट MCLR 7.85% और एक महीने की MCLR 7.95% पर बरकरार रखी है। इसी तरह छह महीने और एक साल की MCLR क्रमशः 8.50% और 8.75% पर अपरिवर्तित है। बैंक की नई MCLR दरें अलग-अलग अवधि के हिसाब से 7.85% से 8.75% के बीच हैं।
क्या होता है MCLR?
MCLR का पूरा नाम मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट है। आसान भाषा में समझें तो यह वह न्यूनतम ब्याज दर है, जिसके नीचे बैंक सामान्य परिस्थितियों में किसी लोन पर ब्याज नहीं ले सकता। RBI ने MCLR व्यवस्था को वर्ष 2016 में लागू किया था। जिन ग्राहकों का लोन MCLR से जुड़ा हुआ है, उनके लिए ब्याज दर में बदलाव होने पर लोन की लागत बढ़ सकती है। इसका असर लोन की EMI या लोन की अवधि पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर आपके लोन के प्रकार, ब्याज रीसेट की तारीख और बैंक की शर्तों पर निर्भर करेगा।
ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
MCLR बढ़ने से सबसे ज्यादा चिंता उन ग्राहकों को हो सकती है, जिनके होम लोन, पर्सनल लोन या अन्य कर्ज इसी बेंचमार्क से जुड़े हैं। अगर संबंधित लोन की ब्याज दर रीसेट होती है, तो ब्याज का बोझ बढ़ सकता है।