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कच्चे तेल की कीमतों में तूफानी गिरावट, एक हफ्ते में 16% टूटा क्रूड ऑयल; 94 डॉलर के नीचे फिसला भाव

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Nov 05, 2026 09:47 am IST,  Updated : Nov 05, 2026 09:47 am IST

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार फिसल रहा ब्रेंट क्रूड अब 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है। महज एक हफ्ते में इसकी कीमत करीब 16 फीसदी टूट चुकी है।

क्रूड ऑयल की कीमतों...- India TV Hindi
क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ी गिरावट Image Source : CANVA

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त गिरावट देखने को मिल रही है। पिछले कुछ दिनों से लगातार फिसल रहे क्रूड ऑयल के दाम अब 94 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गए हैं। महज एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 16 फीसदी की गिरावट आ चुकी है। इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका में मिडटर्म चुनाव के नतीजे और ईरान के साथ युद्ध खत्म होने की बढ़ती उम्मीदें हैं। इसके अलावा मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में सुधार होने से भी बाजार पर दबाव बढ़ा है।

94 डॉलर के नीचे पहुंचा ब्रेंट क्रूड

गुरुवार को ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 97 सेंट यानी 1.03 फीसदी गिरकर 93.65 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड की कीमत 1.14 डॉलर यानी 1.29 फीसदी टूटकर 86.98 डॉलर प्रति बैरल रह गई। इससे पहले कारोबारी सत्र में दोनों प्रमुख बेंचमार्क में 8 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई थी। दोनों के भाव 31 अगस्त के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गए। इस तरह एक हफ्ते में कच्चे तेल की कीमत करीब 16 फीसदी टूट चुकी है।

अमेरिका के चुनाव नतीजों से गिरा तेल

अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी को कांग्रेस के दोनों सदनों में बड़ी जीत मिली है। इससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाना मुश्किल हो सकता है। निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी कांग्रेस का दबाव बढ़ने से ट्रंप युद्ध खत्म करने और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता अपना सकते हैं। ट्रंप ने भी कहा है कि अमेरिका की फिलहाल ईरान पर हमला करने की कोई तत्काल योजना नहीं है। इससे बाजार में युद्ध का खतरा कम होने की उम्मीद बढ़ी है।

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में सुधार

तेल की कीमतों में गिरावट की दूसरी बड़ी वजह सप्लाई में सुधार है। होर्मुज जलडमरूमध्य से कच्चे तेल की आवाजाही अब युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गई है। हालांकि, इसके लिए पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है। जेपी मॉर्गन के मुताबिक, खाड़ी देशों से तेल की सप्लाई दोबारा शुरू होने से वैश्विक बाजार में मांग के मुकाबले ज्यादा तेल उपलब्ध हो गया है। सितंबर में रोजाना 11 लाख बैरल और अक्टूबर में 14 लाख बैरल की अतिरिक्त सप्लाई का अनुमान है।

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