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Crude Oil Price: ट्रंप की नई धमकी से हिला ऑयल मार्केट! 2% तक महंगा हुआ कच्चा तेल, $82 प्रति बैरल पर पहुंचा ब्रेंट क्रूड

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Jun 22, 2026 10:47 am IST,  Updated : Jun 22, 2026 10:47 am IST

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दी गई एक नई और सख्त धमकी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप की इस चेतावनी के तुरंत बाद कच्चे तेल की कीमतों में 2% का भारी उछाल दर्ज किया गया है, जिसके चलते ब्रेंट क्रूड 82 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया है।

क्रूड ऑयल के बढ़े दाम- India TV Hindi
क्रूड ऑयल के बढ़े दाम Image Source : ANI/CANVA

दुनियाभर के ऊर्जा बाजार में एक बार फिर हलचल मच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई चेतावनी ने कच्चे तेल की कीमतों को अचानक उछाल दिया है। सोमवार को ब्रेंट क्रूड 2% से ज्यादा चढ़कर 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 78 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गया। इस तेजी ने निवेशकों और तेल आयात करने वाले देशों की चिंता बढ़ा दी है।

ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी बाजार की बेचैनी

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर हिजबुल्लाह की ओर से इजरायल पर हमले जारी रहे या होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की कोशिश की गई, तो अमेरिका कड़ा कदम उठा सकता है। इस बयान के बाद बाजार में यह डर बढ़ गया कि अमेरिका-ईरान के बीच चल रही बातचीत पटरी से उतर सकती है।

शांति वार्ता पर मंडराया अनिश्चितता का साया

हालांकि दोनों देशों के बीच स्विट्जरलैंड में वार्ता जारी है, लेकिन ईरानी मीडिया ने दावा किया कि ट्रंप की धमकी के बाद तेहरान ने कुछ समय के लिए बातचीत रोक दी थी। दूसरी ओर, वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बातचीत जारी रही और कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र बिंदु

वार्ता में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री मार्ग से गुजरता है। ईरान ने एक बार फिर दावा किया कि उसने इस रास्ते को बंद कर दिया है, लेकिन फिलहाल तेल आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

हाल के हफ्तों में गिरे थे तेल के दाम

पिछले कुछ हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी देखी गई थी। निवेशकों को उम्मीद थी कि अमेरिका-ईरान तनाव कम होने से ऊर्जा बाजार स्थिर होगा। इसी वजह से तेल 73 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया था। लेकिन नई भू-राजनीतिक चिंताओं ने फिर से कीमतों को ऊपर धकेल दिया।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर पड़ सकता है। यदि वैश्विक बाजार में यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई पर भी दबाव बढ़ सकता है।

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