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ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हो रहा पेट्रोल पर ₹18/लीटर और डीज़ल पर ₹35 का नुकसान

 Edited By: Sourabha Suman
 Published : Apr 14, 2026 01:27 pm IST,  Updated : Apr 14, 2026 01:27 pm IST

वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, और आने वाले समय में ईंधन कीमतों में बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है।- India TV Hindi
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है। Image Source : ANI

देश में पेट्रोल और डीज़ल की कीमतें लंबे समय से स्थिर हैं, लेकिन इसके पीछे तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब 18 रुपये प्रति लीटर और डीज़ल पर 35 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान हो रहा है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, कीमतों के नियंत्रण-मुक्त (डिरेगुलेशन) होने के बावजूद, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) ने अप्रैल 2022 से खुदरा ईंधन कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। इस दौरान वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था, जो इस साल की शुरुआत में घटकर करीब 70 डॉलर रह गया। हालांकि, हालिया भू-राजनीतिक तनाव और मध्य पूर्व में हमलों के बाद कीमतें फिर बढ़कर लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। उद्योग सूत्रों के अनुसार, जब पिछले महीने कीमतें चरम पर थीं, तब इन कंपनियों को प्रतिदिन करीब 2,400 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा था। हालांकि, सरकार द्वारा उत्पाद शुल्क (एक्साइज़ ड्यूटी) में 10 रुपये प्रति लीटर की कटौती के बाद यह नुकसान घटकर लगभग 1,600 करोड़ रुपये प्रतिदिन रह गया है। यह राहत सीधे उपभोक्ताओं को देने के बजाय कंपनियों के नुकसान की भरपाई में इस्तेमाल की गई।

जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनियों को घाटा होने की आशंका

विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च में हुए नुकसान ने जनवरी-फरवरी के मुनाफे को खत्म कर दिया है, और जनवरी-मार्च तिमाही में कंपनियों को घाटा होने की आशंका है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म मैक्वेरी ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर तेल विपणन कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री पर नुकसान हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी से प्रति लीटर नुकसान में करीब 6 रुपये का इजाफा होता है। रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में चुनाव खत्म होने के बाद ईंधन की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

भारत 88 प्रतिशत जरूरत का करता है आयात

भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है, जिससे वह वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है। आयात का बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व, रूस और अमेरिका से आता है। इसके बावजूद, भारत पेट्रोलियम उत्पादों का शुद्ध निर्यातक बना हुआ है। सरकार द्वारा एक्साइज़ ड्यूटी में कटौती के बावजूद, वर्तमान दरें पेट्रोल पर करीब 11.9 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 7.8 रुपये प्रति लीटर हैं। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर एक्साइज ड्यूटी पूरी तरह हटा भी दी जाए, तब भी तेल कंपनियों के नुकसान की पूरी भरपाई नहीं हो पाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, टैक्स में और कटौती का असर सरकारी राजस्व पर भी पड़ेगा। अनुमान है कि अगर एक्साइज़ ड्यूटी पूरी तरह खत्म की जाती है, तो सरकार को सालाना लगभग 36 अरब डॉलर (करीब 3 लाख करोड़ रुपये) का नुकसान हो सकता है, जिससे राजकोषीय घाटा बढ़ने का खतरा है। उधर, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें देश के चालू खाता घाटे को भी बढ़ा सकती हैं, जो 2026 की पहली तिमाही में करीब 20 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

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