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डीजल की मांग में ग्रोथ कोविड महामारी के बाद सबसे कम हो गई, वजह क्या है यहां जान लें

 Published : Apr 14, 2025 04:24 pm IST,  Updated : Apr 14, 2025 04:28 pm IST

शहरों में इलेक्ट्रिक बसों को तेजी से अपनाया जा रहा है। कई टियर-2 और टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा (ई-रिक्शा) प्रमुख हो गए हैं। इनका असर यह हुआ है कि शहरी सार्वजनिक परिवहन में डीजल का उपयोग सीधे तौर पर कम हो रहा है।

भारत में इस्तेमाल होने वाले तेल में डीजल का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है। - India TV Hindi
भारत में इस्तेमाल होने वाले तेल में डीजल का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है। Image Source : INDIA TV

डीजल की डिमांड में ग्रोथ कोविड महामारी के बाद बीते 31 मार्च को खत्म हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में सबसे कम दर्ज की गई है। तेल मंत्रालय के पेट्रोलियम नियोजन और विश्लेषण प्रकोष्ठ (पीपीएसी) द्वारा सोमवार को जारी अनंतिम आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 (अप्रैल 2024 से मार्च 2025) वित्त वर्ष में डीजल की खपत 2 प्रतिशत बढ़कर 91.4 मिलियन टन हो गई। पीटीआई की खबर के मुताबिक, मांग में कमी के पीछे अर्थव्यवस्था धीमी गति से बढ़ना और खपत स्वच्छ ईंधन की तरफ बढ़ना बताया गया है।

इलेक्ट्रिक वाहन बन रहे बड़ी वजह

खबर के मुताबिक, ट्रकों और कृषि मशीनरी को चलाने के लिए उपयोग में लाए जाने वाले डीजल की मांग में 2024-25 में बढ़ोतरी पिछले वित्त वर्ष में 4.3 प्रतिशत और 2022-23 में 12.1 प्रतिशत से धीमी थी। आंकड़ों में बताया गया है कि भारत में इस्तेमाल होने वाले तेल में डीजल का हिस्सा करीब 40 प्रतिशत है। आंकड़ों के साथ यह भी बताया गया है कि इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) भारत में डीजल की मांग को नया रूप देना शुरू कर रहे हैं। यहां यह भी समझने वाली बात है कि मांग में बढ़ोतरी से नरमी देश में आर्थिक गतिविधियों को दर्शाती है। कहा गया है कि डीजल अभी भी भारत के परिवहन क्षेत्र के तीन-चौथाई हिस्से को संचालित करता है, लेकिन इलेक्ट्रिकल व्हीकल शिफ्ट के चलते ग्रोथ धीमी हो रही है।

सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक गाड़ियों के आने का असर

उद्योग अधिकारियों ने कहा कि पेट्रोल के मुकाबले धीमी खपत वृद्धि मुख्य रूप से वाणिज्यिक ईवी शिफ्ट के चलते थी। दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में इलेक्ट्रिक बसों को तेजी से अपनाया जा रहा है। कई टियर-2 और टियर-3 शहरों में इलेक्ट्रिक ऑटो-रिक्शा (ई-रिक्शा) प्रमुख हो गए हैं। इनका असर यह हुआ है कि शहरी सार्वजनिक परिवहन में डीजल का उपयोग सीधे तौर पर कम हो रहा है। साथ ही बड़ी-बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां डिलीवरी व्हीकल्स के तौर पर इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को तवज्जो दे रही हैं। ऐस बदलाव के चलते डीजल से चलने वाली वैन और लाइट कमर्शियल व्हीकल्स प्रभावित होते हैं, जिससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में मांग कम हो रही है।

पेट्रोल और जेट ईंधन की खपत

पेट्रोल की खपत 7.5 प्रतिशत बढ़कर 40 मिलियन टन हो गई, जबकि LPG की मांग 5.6 प्रतिशत बढ़कर 31.32 मिलियन टन हो गई। जेट ईंधन की खपत 2024-25 में लगभग 9 प्रतिशत बढ़कर लगभग 9 मिलियन टन हो गई। इंडस्ट्रीज में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाले नेफ्था की मांग 4.8 प्रतिशत घटकर 13.15 मिलियन टन रह गई, जबकि ईंधन तेल की खपत करीब एक प्रतिशत घटकर 6.45 मिलियन टन रह गई।

कुल मिलाकर, भारत में पेट्रोलियम उत्पादन की खपत 21 प्रतिशत बढ़कर 239.171 मिलियन टन हो गई। यह वृद्धि 2023-24 में 5 प्रतिशत, पिछले वर्ष 10.6 प्रतिशत और 2021-22 में 3.8 प्रतिशत की वृद्धि से धीमी थी। अगर 2019-20 और 2020-21 के कोविड प्रभावित दो सालों को छोड़ दिया जाए तो 2024-25 में तेल की खपत में वृद्धि एक दशक में सबसे धीमी होगी।

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