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पिछले 11 साल में कितना बदल गया देश का एग्रीकल्चर सेक्टर? जानिए बजट, उत्पादन और MSP से लेकर KCC तक के ये आंकड़े

 Written By: Pawan Jayaswal
 Published : Jun 07, 2025 04:31 pm IST,  Updated : Jun 07, 2025 04:31 pm IST

भारत का खाद्यान्न उत्पादन 2014-15 में 26.50 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में अनुमानित 34.74 करोड़ टन हो गया है, जो कृषि उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्शाता है।

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एग्रीकल्चर Image Source : FILE

सरकार ने शनिवार को कहा कि पिछले 11 वर्षों में विभिन्न सरकारी योजनाओं और बढ़े हुए बजटीय आवंटन के माध्यम से भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर में बड़ा बदलाव आया है। इस बदलाव ने भारत को ग्लोबल एग्रीकल्चर लीडर के रूप में स्थापित किया है। सरकार ने कहा, “पिछले 11 वर्षों में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के एग्रीकल्चर सेक्टर में व्यापक परिवर्तन आया है, जो बीज से बाजार तक की फिलोसॉफी पर आधारित है।” कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के लिए बजट अनुमान 2013-14 में 27,663 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 1,37,664.35 करोड़ रुपये हो गया है, जो लगभग पांच गुना वृद्धि है।

खाद्यान्न उत्पादन में शानदार बढ़ोतरी

भारत का खाद्यान्न उत्पादन 2014-15 में 26.50 करोड़ टन से बढ़कर 2024-25 में अनुमानित 34.74 करोड़ टन हो गया है, जो कृषि उत्पादन में मजबूत वृद्धि दर्शाता है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में भी उल्लेखनीय वृद्धि की है। गेहूं का एमएसपी 2013-14 में 1,400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2024-25 में 2,425 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। जबकि धान का मूल्य 2013-14 में 1,310 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2025-26 में 2,369 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। फरवरी, 2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना के तहत सरकार ने 11 करोड़ से अधिक किसानों को 3.7 लाख करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

KCC से 7.71 करोड़ किसानों को फायदा

किसान क्रेडिट कार्ड योजना ने 7.71 करोड़ किसानों को लगभग 10 लाख करोड़ रुपये का लोन प्रदान किया है। खरीद के आंकड़े विभिन्न फसलों में सुधार दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2014-15 से वित्त वर्ष 2024-25 के बीच खरीफ फसल की खरीद कुल 78.71 करोड़ टन रही, जबकि 2004-05 से 2013-14 के बीच यह खरीद 46.79 करोड़ टन थी। एमएसपी पर दलहनों की खरीद 2009-2014 के दौरान 1,52,000 टन से बढ़कर 2020-2025 के दौरान 83 लाख टन हो गई, जबकि एमएसपी पर तिलहन की खरीद पिछले 11 वर्षों में कई गुना बढ़ गई।

खाद्य सुरक्षा पर है फोकस

सरकार का दृष्टिकोण आधुनिक सिंचाई, ऋण पहुंच, डिजिटल बाजार और एग्री-टेक्नोलॉजी इनोवेशंस पर केंद्रित रहा है। जबकि बाजरा की खेती और प्राकृतिक खेती जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं को पुनर्जीवित किया गया है। डेयरी और मत्स्य पालन सहित संबद्ध क्षेत्रों का भी विस्तार हो रहा है। बयान के अनुसार, “जैसे-जैसे भारत अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, इसके सशक्त किसान देश को खाद्य सुरक्षा से लेकर वैश्विक खाद्य नेतृत्व तक ले जाने के लिए तैयार हैं।”

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