उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप विभिन्न टैक्स छूट के लिए पात्र हैं। साथ ही ऐसे स्टार्टअप में किए गए निवेश लाभ के लिए पात्र हैं। ये जांट के अधीन नहीं हैं। आयकर विभाग ने शुक्रवार को यह बात स्पष्ट कर दी। पीटीआई की खबर के मुताबिक, हालांकि विभाग ने यह भी कहा कि जरूरी शर्तों को पूरा नहीं करने वाली कंपनियों में निवेश की जांच विभाग द्वारा अपनाई गई जोखिम प्रबंधन रणनीति के आधार पर की जा सकती है।
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एक्स पर एक पोस्ट में दी जानकारी
खबर के मुताबिक, आयकर विभाग ने एक एक्स पोस्ट का जवाब देते हुए एक्स पर एक पोस्ट में कहा-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप जो 19 फरवरी, 2019 को डीपीआईआईटी (उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग) की अधिसूचना में निर्धारित शर्तों को पूरा करते हैं और फॉर्म-2 में घोषणा दाखिल करते हैं, वे आयकर अधिनियम, 1961 के तहत विभिन्न कर छूट और कटौती के लिए पात्र हैं। ऐसी कंपनियों में किए गए निवेश लाभ के लिए पात्र हैं और जांच के अधीन नहीं हैं।
स्टार्टअप की परिभाषा में भी ढील
19 फरवरी, 2019 को सरकार ने स्टार्टअप की परिभाषा में ढील दी थी और उन्हें 25 करोड़ रुपये तक के निवेश पर पूर्ण एंजल टैक्स रियायत का लाभ उठाने की अनुमति दी थी। ये टैक्स छूट प्रदान करने के लिए, विभाग ने स्टार्टअप की परिभाषा में भी ढील दी थी।
31 जनवरी तक 1,61,150 यूनिट को स्टार्टअप की मान्यता मिली
सरकार ने इस साल 31 जनवरी तक 1,61,150 यूनिट को स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी है। इनमें से 28,511 यूनिट को महाराष्ट्र में और 16,954 यूनिट को कर्नाटक में स्टार्टअप के रूप में मान्यता दी गई है। मान्यता प्राप्त इकाइयां, स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान के तहत कर प्रोत्साहन की पात्र हैं। स्टार्टअप इंडिया पहल के तहत मान्यता प्राप्त स्टार्टअप को समर्थन प्रदान किया जाता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल भारत के कृषि खाद्य प्रौद्योगिकी (एग्रीफूडटेक) स्टार्टअप में निवेश तीन गुना होकर 2.5 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।