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US टैरिफ और ईरान संकट के बीच भारत ने किया कमाल, FY26 में निर्यात बढ़कर $860 अरब पार; नए बाजारों में बनाई मजबूत पकड़

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Apr 17, 2026 07:50 am IST,  Updated : Apr 17, 2026 07:50 am IST

दुनिया भर में चल रहे आर्थिक और राजनीतिक संकटों के बीच भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है। जहां एक ओर अमेरिका के टैरिफ और ईरान से जुड़े तनाव के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, वहीं भारत ने इस चुनौती को अवसर में बदलते हुए अपने निर्यात को बढ़ाने में सफलता हासिल की है।

भारत का एक्सपोर्ट...- India TV Hindi
भारत का एक्सपोर्ट चमका! Image Source : CANVA

दुनिया भर में मचे भू-राजनीतिक उथल-पुथल और आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बेहद शानदार खबर आई है। जब दुनिया के बड़े-बड़े देश अमेरिका के नए टैरिफ नियमों और ईरान-अमेरिका युद्ध की वजह से सप्लाई चेन में आई बाधा से जूझ रहे थे, तब भारत ने न केवल अपनी स्थिति संभाली, बल्कि वैश्विक बाजार में अपनी धाक भी जमाई।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल निर्यात 860.09 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यह पिछले वित्त वर्ष (2024-25) के 825.26 अरब डॉलर के मुकाबले 4.22 फीसदी ज्यादा है। यह वृद्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत ने युद्ध और टैरिफ संकट के बीच भी नए ग्राहक खोजने में सफलता पाई है।

इन क्षेत्रों ने भरी सबसे ऊंची उड़ान

मार्च 2026 के आंकड़ों पर गौर करें तो भारत ने कई परंपरागत और नए क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है। पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले इस बार कृषि, खनिज, मैन्युफैक्चरिंग औरी सी-फूड जैसे समुद्री उत्पाद के निर्यात में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सर्विस सेक्टर में भारत का जलवा

सिर्फ वस्तुओं के मामले में ही नहीं, बल्कि सर्विस सेक्टर में भी भारत ने दुनिया को पीछे छोड़ दिया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सेवा निर्यात में 7.94 फीसदी की वृद्धि का अनुमान है। दिलचस्प बात यह है कि भारत ने अब अमेरिका और यूरोप जैसे पारंपरिक बाजारों के अलावा सिंगापुर, मलेशिया, चीन और तंजानिया जैसे देशों में अपनी सेवाओं का विस्तार किया है।

आयात में आई भारी गिरावट

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक और राहत भरी खबर आयात के मोर्चे पर रही। बीते महीने कई कैटेगरी में आयात घटा है, जो देश के आत्मनिर्भर होने का संकेत है। विशेष रूप से पेट्रोलियम और कच्चे तेल के आयात में 35.91 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज की गई है। आयात कम होने और निर्यात बढ़ने से देश के व्यापार घाटे को कम करने में बड़ी मदद मिली है।

संकट में कैसे मिली सफलता?

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से जब अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन प्रभावित हुई, तो भारत ने अपनी रणनीतिक स्थिति का फायदा उठाया। भारत ने टैरिफ संकट का सामना करने के लिए अपनी व्यापार नीतियों में लचीलापन दिखाया और अफ्रीका व दक्षिण-पूर्व एशिया के नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया।

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