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KFC और Pizza Hut की पैरेंट कंपनियों का होगा मेगा मर्जर, बदलेगा फास्ट-फूड इंडस्ट्री का पूरा गेम; McDonald’s और Domino’s की बढ़ेगी टेंशन!

 Edited By: Shivendra Singh
 Published : Jan 02, 2026 10:49 am IST,  Updated : Jan 02, 2026 10:49 am IST

भारतीय फास्ट-फूड इंडस्ट्री एक बड़े बदलाव की दहलीज पर खड़ी है। जिस सेक्टर में अब तक McDonald’s और Domino’s का दबदबा माना जाता था, वहां अब KFC और Pizza Hut की पैरेंट कंपनियों का मेगा मर्जर गेम बदलने आ रहा है।

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KFC–Pizza Hut चलाने वाली कंपनियों का मर्जर होगा Image Source : OFFICIAL WEBSITE

भारतीय फास्ट-फूड इंडस्ट्री में एक बड़ा भूचाल आने वाला है। जिन केएफसी और पिज्जा हट को देखकर भारतीय ग्राहकों की भूख बढ़ जाती है, अब उनके पीछे खड़ी कंपनियां एक होने जा रही हैं। इस मेगा मर्जर से न सिर्फ क्विक सर्विस रेस्टोरेंट (QSR) सेक्टर का समीकरण बदलेगा, बल्कि McDonald’s और Domino’s जैसे दिग्गजों की मुश्किलें भी बढ़ सकती हैं। सैफायर फूड्स इंडिया लिमिटेड के देवयानी इंटरनेशनल लिमिटेड में विलय की घोषणा ने बाजार और इंडस्ट्री दोनों में हलचल मचा दी है।

केएफसी-पिज्जा हट की पैरेंट कंपनियों का बड़ा फैसला

कंपनी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, केएफसी और पिज्जा हट की ऑपरेटर सैफायर फूड्स अब देवयानी इंटरनेशनल में मर्ज होगी। यह वही देवयानी है, जो भारत में पहले से ही कई बड़े QSR ब्रांड्स को ऑपरेट करती है। इस डील के तहत सैफायर के हर 100 शेयरों पर देवयानी 177 शेयर जारी करेगी। मर्जर के बाद बनने वाली संयुक्त कंपनी को दूसरे पूरे साल से सालाना 210-225 करोड़ रुपये तक की सिनर्जी मिलने की उम्मीद है।

क्यों जरूरी हो गया यह मर्जर?

दरअसल, भारत में फास्ट-फूड सेक्टर इन दिनों दबाव में है। महंगाई और बढ़ती जीवन-यापन लागत के चलते लोग बाहर खाने और ऑनलाइन फूड ऑर्डर पर कटौती कर रहे हैं। इसका सीधा असर रेस्टोरेंट्स की बिक्री और मुनाफे पर पड़ा है। सैफायर और देवयानी दोनों ही कंपनियों ने सितंबर तिमाही में बढ़ते खर्च और नुकसान की रिपोर्ट दी है। ऐसे में लागत कम करने, स्केल बढ़ाने और मुनाफे को सुधारने के लिए यह मर्जर अहम माना जा रहा है।

मैकडॉनल्ड्स और डोमिनोज की क्यों बढ़ेगी टेंशन?

मर्जर पूरा होने के बाद देवयानी इंटरनेशनल भारत की सबसे बड़ी QSR ऑपरेटर कंपनियों में शामिल हो जाएगी। केएफसी और पिज्जा हट के पूरे भारतीय फ्रेंचाइजी राइट्स एक ही कंपनी के पास होंगे। इसके अलावा, श्रीलंका जैसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी कंपनी की मौजूदगी और मजबूत होगी। इससे मैकडॉनल्ड्स (Westlife Foodworld) और डोमिनोज (Jubilant FoodWorks) पर कॉम्पिटिशन दबाव बढ़ना तय है।

मंजूरी में लगेगा वक्त

हालांकि, यह डील तुरंत पूरी नहीं होगी। इसके लिए स्टॉक एक्सचेंज, CCI, NCLT, शेयरधारकों और कर्जदाताओं की मंजूरी जरूरी है। इस प्रक्रिया में करीब 12 से 15 महीने का समय लग सकता है। मंजूरी मिलने के बाद ही मर्जर प्रभावी होगा।

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