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अमेजन-फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर मिल रही भारी छूट, भारी टेंशन में छोटे दुकानदार

 Written By: Sunil Chaurasia
 Published : Oct 12, 2026 11:38 pm IST,  Updated : Oct 12, 2026 11:38 pm IST

सुशील पोद्दार ने कहा कि चिंता ई-कॉमर्स के विस्तार को लेकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच कीमतों में बड़े अंतर को लेकर है।

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ऑनलाइन शॉपिंग पर भारी छूट से छोटे दुकानदार परेशान Image Source : ANI

पश्चिम बंगाल के व्यापारिक संगठन CWBTA ने त्योहारी सीजन के दौरान ऑनलाइन बिक्री में उछाल और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर भारी छूट को लेकर सोमवार को चिंता जताई। संगठन ने कहा कि ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों के बीच अंतर बढ़ने से पारंपरिक खुदरा कारोबार प्रभावित हो रहा है। 'पश्चिम बंगाल व्यापार संघों के परिसंघ' (CWBTA) ने दावा किया कि ई-कॉमर्स कंपनियों ने त्योहारी सीजन के शुरुआती दो दिनों में ही करीब 24,000 करोड़ रुपये का सामान बेच दिया है।

ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच कीमतों में बड़े अंतर को लेकर चिंता

संगठन के अध्यक्ष सुशील पोद्दार ने कहा कि चिंता ई-कॉमर्स के विस्तार को लेकर नहीं, बल्कि ऑनलाइन और ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच कीमतों में बड़े अंतर को लेकर है। उन्होंने कहा, ''सिर्फ 2 दिन में करीब 24,000 करोड़ रुपये की ऑनलाइन बिक्री से उपभोक्ताओं की खरीदारी के रुझान में बड़े पैमाने पर बदलाव का पता चलता है। हालांकि, जब इतनी बड़ी बिक्री कीमतों में भारी अंतर के कारण होती है, तो ऑफलाइन कारोबारियों पर इसके असर को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पारंपरिक खुदरा विक्रेता कारोबार खो रहे हैं, क्योंकि वे बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स की कीमतों से मुकाबला नहीं कर सकते।'' 

दुकानदारों पर कई तरह का बोझ

सुशील पोद्दार ने कहा कि पारंपरिक दुकानदारों को दुकान का किराया, कर्मचारियों की सैलरी, बिजली, टैक्स, परिवहन, माल के भंडारण और रखरखाव जैसे खर्च उठाने पड़ते हैं। इसके अलावा, उनके पास मुनाफे का मार्जिन भी कम रहता है। उन्होंने कहा कि कीमतों के आधार पर प्रतिस्पर्धा स्वस्थ है, लेकिन जब कीमतों में अंतर बहुत ज्यादा हो जाता है, तो प्रतिस्पर्धा का समान अवसर प्रभावित होता है। एक ही उत्पाद की कीमत केवल ऑनलाइन या स्थानीय दुकान से खरीदने के आधार पर बहुत अलग नहीं होनी चाहिए। 

CWBTA ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से प्रभाव की समीक्षा करने का आग्रह

CWBTA ने सरकार और संबंधित प्राधिकरणों से ऑनलाइन और ऑफलाइन कीमतों के बीच बढ़ते अंतर तथा पारंपरिक खुदरा कारोबार पर इसके दीर्घकालिक प्रभाव की समीक्षा करने का आग्रह किया। उसने समान उत्पाद और ब्रांड के मामले में कीमतों में पारदर्शिता तथा ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विक्रेताओं के बीच उचित मूल्य समानता सुनिश्चित करने की मांग की। 

CAIT ने भी जताई चिंता

व्यापारी संगठन 'कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स' (CAIT) ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताते हुए कहा कि वो डिजिटल कारोबार के खिलाफ नहीं है, लेकिन ऐसी मूल्य नीतियां स्वीकार्य नहीं हैं जिनसे पारंपरिक कारोबारियों के लिए टिके रहना मुश्किल हो जाए। संगठन ने ऑनलाइन एवं ऑफलाइन विक्रेताओं पर समान रूप से नियम लागू करने की मांग की। 

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