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नेपाल की इकोनॉमी को कितना समझते हैं आप? जानें देश का विदेशी मुद्रा भंडार और क्या है जीडीपी ग्रोथ का अनुमान

 Written By: Sourabha Suman
 Published : Sep 10, 2025 08:33 am IST,  Updated : Sep 10, 2025 08:39 am IST

नेपाल की अर्थव्यवस्था को लेकर आपके मन में कई सवाल हो सकते हैं। हाल के समय में, देश के विदेशी मुद्रा भंडार और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि के अनुमानों ने वैश्विक स्तर पर ध्यान खींचा है।

नेपाल का वस्तु निर्यात जुलाई 2025 के दौरान 29.7 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया।- India TV Hindi
नेपाल का वस्तु निर्यात जुलाई 2025 के दौरान 29.7 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया। Image Source : CANVA

दक्षिण एशिया का एक छोटा लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश, नेपाल, आज आर्थिक मोर्चे पर कई उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। हिमालय की गोद में बसे इस राष्ट्र की अर्थव्यवस्था पिछले कुछ वर्षों में आंतरिक और बाहरी दोनों चुनौतियों का सामना करते हुए लगातार बदलाव के दौर से गुजर रही है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि नेपाल का विदेशी मुद्रा भंडार इस समय किस स्थिति में है, और आने वाले समय में देश की जीडीपी ग्रोथ का अनुमान क्या लगाया जा रहा है। आइए, हम नेपाल की मौजूदा अर्थव्यवस्था और भविष्य की संभावनाओं को समझने की कोशिश करते हैं। 

नेपाल की अर्थव्यवस्था का आकार

वर्ल्ड बैंक के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में नेपाल का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 42.91 अरब अमेरिकी डॉलर का था। नेपाल का जीडीपी मूल्य विश्व अर्थव्यवस्था का 0.04 प्रतिशत है। दिसंबर 2024 की स्थिति के मुताबिक, नेपाल की प्रति व्यक्ति जीडीपी 1179.81 अमेरिकी डॉलर थी, जबकि क्रय शक्ति समता यानी PPP के आधार पर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद या जीडीपी 5046.82 अमेरिकी डॉलर थी।

macrotrends के मुताबिक, 2023 के लिए नेपाल की जीडीपी 40.91 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो 2022 से 0.67% कम थी। साल 2022 के लिए नेपाल की जीडीपी 41.18 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो 2021 से 11.53% अधिक थी। 2021 के लिए नेपाल की जीडीपी 36.92 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो 2020 से 10.44% अधिक दर्ज की गई। 2020 के लिए नेपाल की जीडीपी 33.43 अरब अमेरिकी डॉलर थी, जो 2019 से 2.2% कम है।

नेपाल का कितना है विदेश मुद्रा भंडार

केयर रेटिंग्स के मुताबिक, मध्य जून 2025 तक, नेपाल का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 18.7 अरब अमेरिकी डॉलर के लेवल पर रिकॉर्ड किया गया। यह आंकड़ा पिछले साल यानी मध्य जुलाई 2024 की तुलना में 22.5% की शानदार वृद्धि दिखाता है। यह मजबूत भंडार नेपाल के 14.7 महीनों के आयात खर्च ( जुलाई 2025 से अगले) को कवर करने के लिए पर्याप्त है, जो देश की आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा संकेत है। 

रेमिटेंस और व्यापार की स्थिति

प्रवासी नेपालियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) का प्रवाह भी जुलाई 2025 में मजबूत देखा गया, हालांकि इसमें हल्की मासिक गिरावट देखी गई है। मध्य जून में, यह राशि 176.3 अरब नेपाली रुपये थी, जो मई 2025 के 165.3 अरब नेपाली रुपये से थोड़ी कम है।

निर्यात में जबरदस्त उछाल, आयात भी बढ़ा

नेपाल का वस्तु निर्यात जुलाई 2025 के दौरान 29.7 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया, जबकि एक साल पहले यह सिर्फ 13.1 अरब नेपाली रुपये था। इस वृद्धि के पीछे सोयाबीन तेल, पॉलिएस्टर यार्न, जूट उत्पाद, चाय और रॉज़िन जैसी वस्तुओं की भारी मांग रही है।

निर्यात में वृद्धि के साथ-साथ, आयात में भी 13.5% की सालाना वृद्धि हुई, जिससे यह 170.6 अरब नेपाली रुपये तक पहुंच गया। इसका सीधा असर व्यापार घाटे पर पड़ा, जो बढ़कर 141 अरब नेपाली रुपये हो गया। यह आंकड़ा पिछले जून 2025 और पिछले साल की तुलना में ज्यादा है, जो एक चुनौती बनी हुई है।

कितनी रफ्तार से बढ़ेगी अर्थव्यवस्था

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, नेपाल की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2026-27 में सालाना औसतन 5.4 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि वर्ल्ड बैंक ने यह भी कहा है कि नेपाल के आर्थिक विकास के लिए जोखिम मुख्यतः नकारात्मक दिशा में हैं। भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और बढ़ते व्यापार प्रतिबंधों जैसे बाहरी जोखिम, वस्तुओं की कीमतों को बढ़ा सकते हैं। नेपाल का विकास मॉडल रेमिटेंस और पर्यटन पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए भागीदार देशों की वृद्धि में मंदी के परिणामस्वरूप रेमिटेंस और पर्यटन दोनों में गिरावट आ सकती है, जिससे आर्थिक विकास और भी बाधित हो सकता है।

कृषि और प्रवासी रेमिटेंस पर टिकी है नेपाल की अर्थव्यवस्था

नेपाल की अर्थव्यवस्था मुख्य तौर पर कृषि और प्रवासी श्रमिकों से हासिल धन पर बहुत अधिक निर्भर है। हालांकि, पर्यटन और जलविद्युत का योगदान भी बढ़ रहा है। कृषि रोजगार का मुख्य आधार और सकल घरेलू उत्पाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है, जबकि विदेशी धन राष्ट्रीय आय और निजी खपत को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाता है। नेपाल की अर्थव्यवस्था आवश्यक वस्तुओं के लिए आयात पर भी निर्भर है।

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