शोरूम में चमचमाती गाड़ी, नई कार की खुशबू और पहली ड्राइव का जोश… नई कार खरीदने का सपना हर किसी का होता है। लेकिन इसी उत्साह में कई लोग एक बड़ी गलती कर बैठते हैं। अक्सर नए कार खरीदार वाहन खरीदने से पहले तो खूब रिसर्च कर लेते हैं, लेकिन इंश्योरेंस के नाम पर डीलर जो देता है, वही ले लेते हैं। नतीजा? जेब से हजारों रुपये ज्यादा निकल जाते हैं, जबकि बेहतर कवरेज और कम प्रीमियम आसानी से मिल सकता था।
आज जानिए कुछ जरूरी बातें, जो हर नए कार खरीदार को इंश्योरेंस चुनते समय ध्यान रखनी चाहिए, वरना आपकी नई कार की खुशी भारी खर्चों के नीचे दब सकती है।
डीलर से इंश्योरेंस लेना जरूरी नहीं
कई लोग मानते हैं कि कार खरीदते वक्त डीलर से ही इंश्योरेंस लेना पड़ेगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। IRDAI के नियम साफ कहते हैं कि खरीदार किसी भी कंपनी से इंश्योरेंस ले सकता है। डीलर के प्लान में अक्सर कमीशन और सीमित विकल्पों के कारण प्रीमियम ज्यादा होता है। उदाहरण- एक ग्राहक को डीलर ने 25,000 रुपये का प्लान ऑफर किया, जबकि ऑनलाइन वही प्लान मात्र 18,500 रुपये में मिल गया, जो सीधे-सीधे 6,500 रुपये की बचत है।
डायरेक्ट या ऑनलाइन खरीदेंगे
बीमा एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सीधे इंश्योरेंस कंपनी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से पॉलिसी खरीदने पर आप 10-15% तक प्रीमियम बचा सकते हैं। साथ ही आपको बेहतर तुलना, कस्टमाइज्ड IDV,अपनी पसंद के ऐड-ऑन (जैसे जीरो डेप्रीसिएशन, रिटर्न टू इनवॉइस आदि), बिना किसी कमिशन के पारदर्शी कीमत और ज्यादा बचत मिलेगा।
लॉन्ग-टर्म प्लान
हर साल इंश्योरेंस रिन्यू करने की झंझट से बचना चाहते हैं? तो 3 साल का लॉन्ग-टर्म प्लान सही रहेगा। इससे आप 10-15% तक एक्स्ट्रा बचत कर सकते हैं। उदाहरण- अगर 1 साल का प्रीमियम 18,000 रुपये है, तो 3 साल का रिन्यूअल 54,000 होता, लेकिन लॉन्ग-टर्म प्लान सिर्फ 48,000 में मिल सकता है, जो 6,000 रुपये की सीधी बचत है।
थर्ड-पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव?
थर्ड-पार्टी पॉलिसी कानूनी रूप से जरूरी है, लेकिन यह आपकी कार का नुकसान कवर नहीं करती। वहीं, नई कारों के लिए हमेशा कॉम्प्रिहेंसिव प्लान ही बेहतर है।



































