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E20 पर नहीं रुकेगी एथेनॉल की कहानी, सरकार अब तैयार कर रही नई स्ट्रैटेजी; जानिए क्या?

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 09, 2026 07:47 pm IST,  Updated : Sep 09, 2026 07:49 pm IST

पेट्रोल में 20 फीसदी एथेनॉल मिलाने यानी E20 के बाद अब सरकार इससे भी आगे बढ़ने की तैयारी कर रही है। सरकार का फोकस अब ऐसे फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों पर है, जो ज्यादा मात्रा में एथेनॉल वाले ईंधन पर भी चल सकें।

E20 के आगे बढ़ेगा एथेनॉल...- India TV Hindi
E20 के आगे बढ़ेगा एथेनॉल ब्लेंडिंग Image Source : ANI

भारत में एथेनॉल ब्लेंडिंग को लेकर सरकार अब अगला बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। अभी तक देश में E20 यानी पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाने पर जोर रहा है, लेकिन सरकार की प्लानिंग अब यहीं रुकने की नहीं है। प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में एथेनॉल ब्लेंडिंग को E20 से आगे ले जाया जा सकता है। इसके लिए फ्लेक्सी-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा देने और पेट्रोल पंपों पर शुद्ध एथेनॉल की उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

E20 के बाद अब क्या है सरकार की प्लानिंग ?

तरुण कपूर ने कहा कि E20 प्रोग्राम अब तक काफी सफल रहा है। कई वाहन कंपनियां जल्द ही फ्लेक्सी-फ्यूल वाहन बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं। इन वाहनों में अलग-अलग मात्रा में एथेनॉल मिश्रित ईंधन का इस्तेमाल किया जा सकेगा। सरकार का फोकस अब E20 से ज्यादा एथेनॉल ब्लेंडिंग की अनुमति देने पर है। हालांकि, इसके लिए पेट्रोल पंपों पर शुद्ध एथेनॉल उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।

पश्चिम एशिया संकट ने बढ़ाई जरूरत

एथेनॉल पर सरकार का जोर ऐसे समय बढ़ा है, जब पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की सप्लाई और कीमतों को लेकर चिंता बढ़ी हुई है। क्रूड ऑयल की कीमत करीब 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने के बीच भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए घरेलू विकल्पों को बढ़ाना अहम हो गया है। कपूर ने कहा कि देश में जो भी संसाधन उपलब्ध हैं, उनका अधिक से अधिक इस्तेमाल करने की जरूरत है। एथेनॉल इसका एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है।

एथेनॉल उत्पादन क्षमता जरूरत से ज्यादा

देश में एथेनॉल उत्पादन की क्षमता अब ब्लेंडिंग की मौजूदा जरूरत से आगे निकल चुकी है। ऐसे में सरकार और उद्योग के सामने ज्यादा एथेनॉल के इस्तेमाल की चुनौती भी है। इसके लिए एथेनॉल से जुड़े नए उत्पाद और दूसरे उपयोग तलाशने पर जोर दिया जा रहा है।

डीजल के लिए भी बायोफ्यूल पर नजर

सरकार की प्लानिंग सिर्फ पेट्रोल तक सीमित नहीं है। डीजल में बायोफ्यूल आधारित एडिटिव्स के इस्तेमाल पर भी काम चल रहा है। आइसोब्यूटेनॉल को लेकर किए जा रहे प्रयोग सफल होते हैं तो बायोफ्यूल क्षेत्र में एक बड़ा नया रास्ता खुल सकता है। इसके अलावा सरकार GOBARdhan योजना के जरिए कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) को बढ़ावा देना चाहती है। एथेनॉल कंपनियों को CBG और पोटाश जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों में भी कारोबार बढ़ाने की सलाह दी गई है।

इनपुट- PTI

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