रियल एस्टेट डेटा एनालिटिक्स फर्म PropEquity की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से सितंबर 2025 के दौरान मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) और पुणे के हाउसिंग सेल्स में 17% की गिरावट दर्ज की गई है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, पिछले साल की समान अवधि में बेची गई 59,816 यूनिट्स की तुलना में इस तिमाही में 49,542 यूनिट्स की बिक्री हुई है। इस गिरावट का मुख्य कारण रेसिडेंशियल प्रॉपर्टी की कीमतों में तेज वृद्धि और इसके परिणामस्वरूप घटती मांग को बताया गया है।
एमएमआर और पुणे के प्रमुख क्षेत्रों में बिक्री का हाल
मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन के प्रमुख बाजारों में बिक्री में अच्छी-खासी कमी आई है। प्राइमरी हाउसिंग मार्केट ठाणे में सबसे ज्यादा 28% की भारी गिरावट देखी गई है, जहां बिक्री 14,877 यूनिट्स (पिछले साल 20,620 यूनिट्स) रही। मुंबई में बिक्री में 8% की कमी आई और यह 9,691 यूनिट्स (पिछले साल 10,480 यूनिट्स) पर आ गई। नवी मुंबई में 6% की गिरावट हुई, बिक्री 7,212 यूनिट्स (पिछले साल 7,650 यूनिट्स) रही। महाराष्ट्र के एक अन्य प्रमुख हाउसिंग मार्केट पुणे में भी बिक्री में 16% की गिरावट दर्ज की गई है। यहां इस तिमाही में 17,762 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 21,066 यूनिट्स था।
चिंता की बात नहीं
जहां PropEquity के आंकड़े गिरावट दर्शाते हैं, वहीं रियल एस्टेट डेवलपर्स की संस्था CREDAI-MCHI ने इसे चिंता का विषय नहीं माना है। डेवलपर्स का मानना है कि यह गिरावट एक अस्थाई "समायोजन" है और बाजार की दीर्घकालिक मांग मजबूत बनी हुई है। CREDAI-MCHI के अध्यक्ष, सुखराज नाहर ने कहा कि मांग को मेट्रो कॉरिडोर, कोस्टल रोड और NMIA (नवी मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट) जैसे बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स से दीर्घकालिक सकारात्मक समर्थन मिलेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि 22 सितंबर से शुरू हुआ फेस्टिव सीजन मांग को फिर से बढ़ाएगा, इसे "बाजार के लिए एक स्वस्थ समायोजन" बताया।
CREDAI-MCHI सचिव, रुशी मेहता ने इस बात पर जोर दिया कि असली उपभोक्ता की मांग अभी भी बरकरार है। उनके अनुसार, छोटे स्तर के उतार-चढ़ाव बेस इफेक्ट और डेवलपर्स द्वारा सतर्क लॉन्चिंग की वजह से हैं, जो दीर्घकालिक स्थिरता के लिए आपूर्ति को वास्तविक मांग के अनुरूप समायोजित कर रहे हैं।
कोषाध्यक्ष, निकुंज सांगवी ने MMR और पुणे के महत्व को रेखांकित किया, जो भारत के कुल हाउसिंग मार्केट का लगभग आधा हिस्सा हैं। उन्होंने स्थिर ब्याज दरों और RERA के तहत नियमों की स्पष्टता को देखते हुए निवेशकों का भरोसा मजबूत बताया। सांगवी को पूरा विश्वास है कि फेस्टिव सीजन और सस्ते तथा मिड-सेगमेंट हाउसिंग के लिए नीतिगत प्रोत्साहन के कारण वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में मांग में वृद्धि होगी।
अखिल भारतीय स्तर पर बिक्री का हाल
PropEquity की रिपोर्ट के अनुसार भारत के शीर्ष 9 शहरों (बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई, मुंबई, नवी मुंबई, ठाणे, पुणे, कोलकाता और दिल्ली-एनसीआर) में भी समग्र गिरावट देखी गई है। जुलाई-सितंबर 2025 के दौरान इन शहरों में कुल 1,00,370 यूनिट्स की बिक्री हुई, जो कि सालाना आधार पर 4% और पिछली तिमाही के मुकाबले 1% की कमी दर्शाती है। यह रिपोर्ट बताती है कि भले ही तत्काल बिक्री के आंकड़ों में गिरावट हो, लेकिन रियल एस्टेट डेवलपर्स बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास और आगामी फेस्टिव सीजन के दम पर बाजार के भविष्य को लेकर आशावादी हैं।






































