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10, 20, 50 रुपये के नोटों की भारी किल्लत! कस्बों और ग्रामीण इलाकों की स्थिति ज्यादा खराब

कर्मचारी संघ ने आरबीआई के मुद्रा प्रबंधन विभाग के प्रभारी डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर को लिखे पत्र में कहा कि एटीएम से निकलने वाले ज्यादातर नोट ज्यादा रकम के ही होते हैं।

Edited By: Sunil Chaurasia
Published : Dec 15, 2025 06:37 pm IST, Updated : Dec 15, 2025 06:37 pm IST
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Photo:PIXABAY कर्मचारी संघ ने हालात सुधारने के लिए रिजर्व बैंक को दिए सुझाव

अखिल भारतीय रिजर्व बैंक कर्मचारी संघ (AIRBEA) ने दावा किया है कि देशभर में छोटी रकम वाले नोटों की 'गंभीर किल्लत' हो रही है। सोमवार को संघ ने नोटों की किल्लत पर चिंता जताते हुए बताया कि इसकी वजह से आम लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इतना ही नहीं, छोटी रकम वाले नोटों की भारी किल्लत की वजह से छोटे कारोबारियों का व्यापार भी बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। अखिल भारतीय रिजर्व बैंक कर्मचारी संघ ने इस मामले को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को एक चिट्ठी भेजी है। कर्मचारी संघ ने अपनी चिट्ठी में दावा किया है कि 10, 20 और 50 रुपये के नोट की उपलब्धता देश के कई हिस्सों, खासकर कस्बों एवं ग्रामीण इलाकों में लगभग नगण्य है। हालांकि, इन इलाकों में 100, 200 और 500 रुपये के नोट आसानी से मिल रहे हैं। 

आम लोगों को हो रही है कई तरह की दिक्कतें

कर्मचारी संघ ने आरबीआई के मुद्रा प्रबंधन विभाग के प्रभारी डिप्टी गवर्नर टी. रबी शंकर को लिखे पत्र में कहा कि एटीएम से निकलने वाले ज्यादातर नोट ज्यादा रकम के ही होते हैं। इसके अलावा बैंक की ब्रांच भी ग्राहकों को 10, 20, 50 रुपये के छोटी रकम के नोट नहीं उपलब्ध करा पा रही हैं। रिजर्व बैंक कर्मचारियों के संगठन ने कहा कि ऐसी स्थिति में लोगों को स्थानीय परिवहन, किराने की खरीद और अन्य दैनिक जरूरतों के लिए नकद में लेनदेन कर पाना बहुत मुश्किल हो गया है। AIRBEA ने कहा कि डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दिए जाने के बावजूद चलन में मौजूद कुल मुद्रा लगातार बढ़ रही है। 

कर्मचारी संघ ने हालात सुधारने के लिए रिजर्व बैंक को दिए सुझाव

कर्मचारी संघ के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कैश पर निर्भर बड़ी आबादी का पूरी तरह विकल्प नहीं बन सकता है। इसके अलावा छोटी राशि वाली नोटों की जगह सिक्कों के इस्तेमाल की कोशिशें भी पर्याप्त उपलब्धता न होने के कारण सफल नहीं हो पाई हैं। AIRBEA ने इस मामले में रिजर्व बैंक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि बैंकों और आरबीआई काउंटरों के जरिए छोटे मूल्य के नोटों का पर्याप्त प्रसार सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा, सिक्कों के व्यापक प्रचलन के लिए ‘कॉइन मेला’ दोबारा शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है। सिक्कों के इस मेले को पंचायतों, सहकारी संस्थाओं, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों और स्वयं सहायता समूहों के साथ मिलकर आयोजित किया जा सकता है।

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