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तैयार प्रोडक्ट्स के मुकाबले कच्चे माल पर ज्यादा टैक्स लगाने की तैयारी! मैनुफैक्चरिंग को मिलेगा जोरदार सपोर्ट

Edited By: Sourabha Suman @sourabhasuman Published : May 22, 2024 03:52 pm IST, Updated : May 22, 2024 03:52 pm IST

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुल्क के इस ढांचे के मुद्दों को देखने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ उत्पादों की एक लिस्ट शेयर की है। इसमें कागज, फर्नीचर, वॉशिंग मशीन, सौर ग्लास और एयर प्यूरिफायर शामिल हैं।

देश में मैनुफैक्चरिंग को तेज रफ्तार देने की कोशिश है।- India TV Paisa
Photo:FILE देश में मैनुफैक्चरिंग को तेज रफ्तार देने की कोशिश है।

केंद्र सरकार देश में घरेलू मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा देने की तैयारी में है। सरकार इसी को ध्यान में रखते हुए कागज, फर्नीचर, वॉशिंग मशीन, सौर ग्लास और एयर प्यूरिफायर जैसे उत्पादों पर उलट शुल्क ढांचे यानी तैयार उत्पादों की तुलना में कच्चे माल पर अधिक टैक्स लगाने के मामले का समाधान निकालने पर विचार कर सकती है। भाषा की खबर के मुताबिक, अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी है। तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक शुल्क से विनिर्माताओं के लिए कर्ज और लागत बढ़ती है।

वित्त मंत्रालय के साथ उत्पादों की एक लिस्ट की गई शेयर

खबर के मुताबिक, अधिकारी ने कहा कि वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने शुल्क के इस ढांचे के मुद्दों को देखने के लिए वित्त मंत्रालय के साथ उत्पादों की एक लिस्ट शेयर की है। उद्योग मंडलों और निर्यात संवर्धन परिषदों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह लिस्ट शेयर की गई है। अधिकारी ने कहा कि हमने पहले ही लिस्ट वित्त मंत्रालय को भेज दी है। लिस्ट में कागज, फर्नीचर, वॉशिंग मशीन, सौर ग्लास और एयर प्यूरिफायर शामिल हैं। साथ ही परिधान और आभूषण के कुछ मामले भी हैं।

महंगे कच्चे माल उत्पादों को महंगा बनाते हैं

तैयार उत्पादों के मुकाबले कच्चे माल पर अधिक शुल्क लगने की व्यवस्था घरेलू उद्योग को प्रभावित करता है। इस परिस्थिति में विनिर्माताओं को शुल्क के संदर्भ में कच्चे माल के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है जबकि तैयार उत्पाद पर कम शुल्क और लागत आती हैं। महंगे कच्चे माल उत्पादों को महंगा बनाते हैं और निर्यात बाजार में वे प्रतिस्पर्धी नहीं रह पाते।

घरेलू बाजार में ऐसे उत्पादों का आयात सस्ता होने का खतरा रहता है। इस शुल्क ढांचे का निपटान करने से घरेलू निर्यातकों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। कहा जा रहा है कि इससे निर्यात बढ़ाने और विनिर्माण को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी।

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