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FPIs ने मई में शेयर बाजार से निकाले ₹33,000 करोड़, भारतीय रुपये में जारी गिरावट का दिख रहा बुरा असर

 Edited By: Sunil Chaurasia
 Published : May 31, 2026 01:12 pm IST,  Updated : May 31, 2026 01:12 pm IST

इस साल फरवरी को छोड़कर सभी महीनों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे हैं। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे।

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बीएसई Image Source : PTI

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का घरेलू शेयर बाजार से निकासी का सिलसिला मई में भी जारी रहा। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने भी भारतीय शेयर बाजार से दूरी बनाए रखी और शेयर बेचकर कुल 32,963 करोड़ रुपये निकाल लिए। कंपनियों के उम्मीद से कमजोर तिमाही नतीजों, रुपये में लगातार गिरावट और अन्य वैश्विक बाजारों में बेहतर मौकों के कारण विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार में अपना निवेश घटाया है। नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के अनुसार, साल 2026 में अब तक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से कुल 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। ये राशि पूरे 2025 में हुई 1.66 लाख करोड़ रुपये की निकासी से काफी ज्यादा है। 

इस साल सिर्फ फरवरी में आया निवेश

इस साल फरवरी को छोड़कर सभी महीनों में विदेशी निवेशक शुद्ध बिकवाल रहे हैं। जनवरी में उन्होंने 35,962 करोड़ रुपये निकाले थे, जबकि फरवरी में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो पिछले 17 महीनों का सबसे बड़ा मासिक निवेश था। इसके बाद मार्च में रुख फिर बदल गया और विदेशी निवेशकों ने रिकॉर्ड 1.17 लाख करोड़ रुपये की निकासी की। अप्रैल में 60,847 करोड़ रुपये और मई में करीब 33,000 करोड़ रुपये की निकासी दर्ज की गई। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारतीय कंपनियों की तिमाही नतीजे अपेक्षा से कमजोर रहने, रुपये के लगातार कमजोर होने और अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया तथा ताइवान जैसे बाजारों में बेहतर रिटर्न मिलने से विदेशी निवेशकों ने अपना पैसा वहां लगा दिया है। 

अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार ज्यादा आकर्षक

जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वी.के. विजयकुमार ने कहा कि भारत की तुलना में अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और ताइवान में कंपनियों का प्रदर्शन ज्यादा मजबूत रहा है। साथ ही एआई आधारित तेजी के कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजार विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। सेंट्रिसिटी वेल्थटेक के इक्विटी चीफ सचिन जसूजा ने कहा कि रुपये की लगातार कमजोरी भी एफपीआई निकासी का बड़ा कारण है। उनके अनुसार, साल 2026 में अब तक रुपये में लगभग 6 प्रतिशत और पिछले एक साल में करीब 10 प्रतिशत की गिरावट आई है। उन्होंने कहा कि भारत की कच्चे तेल के आयात पर अत्यधिक निर्भरता भी चिंता का कारण बनी हुई है। 

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