भारत के शेयर बाजार ने एक बार फिर अपनी ताकत दिखाई है। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबर के बाद भारतीय बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता बढ़ी, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और इसका सीधा फायदा भारतीय शेयर बाजार को मिला। इसी तेजी के दम पर बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन (मार्केट वैल्यू) फिर से 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर को पार कर गया, जो पिछले छह हफ्तों का सबसे ऊंचा स्तर है।
अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की दिशा में बढ़ते कदमों ने वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बनाया है। इससे मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है। सबसे बड़ा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा, जिनमें तेज गिरावट देखने को मिली। चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए सस्ते तेल को भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा माना जाता है।
4 दिनों में निवेशकों की संपत्ति में बड़ा इजाफा
पिछले चार कारोबारी सत्रों में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों की कुल मार्केट वैल्यू में 6 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है। वहीं अप्रैल की शुरुआत से अब तक यह आंकड़ा करीब 14 प्रतिशत बढ़ चुका है। इस तेजी के साथ भारतीय बाजार का कुल मार्केट कैप 5 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो आखिरी बार 8 मई को देखा गया था।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई सबसे ज्यादा ताकत
इस रैली में बड़ी कंपनियों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन ज्यादा मजबूत रहा। अप्रैल से अब तक सेंसेक्स करीब 7 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि बीएसई मिडकैप इंडेक्स 16 प्रतिशत, स्मॉलकैप इंडेक्स 23 प्रतिशत और माइक्रोकैप इंडेक्स 26 प्रतिशत तक उछल चुका है।
विदेशी बिकवाली के बावजूद टिके रहे बाजार
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के बावजूद घरेलू निवेशकों के मजबूत निवेश ने बाजार को संभाले रखा है। यदि आने वाले समय में विदेशी निवेश फिर से लौटता है तो बाजार को और मजबूती मिल सकती है। मार्केट एनालिस्ट के अनुसार भारत अभी भी दुनिया की सबसे मजबूत ग्रोथ स्टोरी में से एक है। बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर में सुधार की उम्मीद है। वहीं कई चुनिंदा मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों में निवेश के अच्छे अवसर दिखाई दे रहे हैं।