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दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-हावड़ा, मुंबई-चेन्नई समेत 7 बड़े रेल रूट होंगे फोरलेन; कैबिनेट की मिली हरी झंडी

 Written By: Shivendra Singh
 Published : Sep 09, 2026 03:51 pm IST,  Updated : Sep 09, 2026 04:28 pm IST

मोदी कैबिनेट ने देश के सात हाई डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर पर फोर लेन ट्रैक बनाने की मंजूरी दी है। इस योजना में दिल्ली-हावड़ा, हावड़ा-मुंबई, दिल्ली-मुंबई, दिल्ली-गुवाहाटी, दिल्ली-चेन्नई, हावड़ा-चेन्नई और मुंबई-चेन्नई रूट शामिल हैं।

देश के 7 बड़े रेल रूट...- India TV Hindi
देश के 7 बड़े रेल रूट होंगे फोरलेन Image Source : PIB/CANVA

भारतीय रेलवे को आधुनिक बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के सबसे व्यस्त रेल रूट्स पर ट्रेनों की बढ़ती संख्या और यातायात के दबाव को देखते हुए अब सात हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर को फोरलेन के जरिए मजबूत किया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट ने इन अहम रेलवे परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इससे आने वाले समय में ट्रेनों की क्षमता बढ़ाने और सफर को ज्यादा सुगम बनाने में मदद मिलेगी।

कैबिनेट ब्रीफिंग में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि रेलवे के सात हाई डेंसिटी कॉरिडोर को फोरलेन करने और मौजूदा नेटवर्क को क्वाड्रुपल करने की दिशा में काम किया जा रहा है। इनमें नीचे बताए गए रूट शामिल हैं-

  1. दिल्ली-हावड़ा रेल रूट
  2. हावड़ा-मुंबई रेल रूट
  3. दिल्ली-मुंबई रेल रूट
  4. दिल्ली-गुवाहाटी रेल रूट
  5. दिल्ली-चेन्नई रेल रूट
  6. हावड़ा-चेन्नई रेल रूट
  7. मुंबई-चेन्नई रेल रूट

इन शहरों और राज्यों को मिलेगा फायदा

इन कॉरिडोर से देश के कई बड़े शहर जुड़ते हैं। दिल्ली-हावड़ा रूट पर कानपुर, प्रयागराज, पं. दीनदयाल उपाध्याय, पटना और आसनसोल जैसे प्रमुख स्टेशन आते हैं। वहीं दिल्ली-मुंबई रूट पर मथुरा, कोटा, रतलाम, वडोदरा और सूरत जैसे शहर जुड़े हैं। दिल्ली-चेन्नई रूट आगरा, ग्वालियर, झांसी, भोपाल, नागपुर और विजयवाड़ा जैसे शहरों को जोड़ता है। मुंबई-चेन्नई रूट में पुणे समेत कई महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

8 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी

कैबिनेट ने अलग-अलग राज्यों में 8 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी है। इनमें 3 प्रोजेक्ट पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होंगे। इनसे रेलवे नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी। इन परियोजनाओं की अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है और इन्हें 2029-30 तक पूरा करने की योजना है। इनमें खड़गपुर-झारसुगुड़ा (बागडेही) चौथी लाइन, कटनी-पेंड्रा रोड चौथी लाइन और बिलासपुर (उसलापुर)-पेंड्रा रोड तीसरी लाइन शामिल हैं।

दक्षिण भारत में भी बढ़ेगी रेलवे की क्षमता

कैबिनेट ने तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और तेलंगाना में 5 मल्टी-ट्रैकिंग प्रोजेक्ट्स को भी मंजूरी दी है। इनकी कुल लंबाई करीब 540 किलोमीटर होगी और अनुमानित लागत 10,021 करोड़ रुपये है। इन्हें भी 2029-30 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इनमें अरक्कोनम-रेणिगुंटा तीसरी और चौथी लाइन (77 किमी), व्हाइटफील्ड-बंगारपेट तीसरी और चौथी लाइन (47 किमी), होसुर-ओमलूर डबलिंग (147 किमी), सेलम-करूर-दिंडीगुल डबलिंग (159 किमी) और सिकंदराबाद (घाटकेसर)-काजीपेट मल्टीट्रैकिंग (110 किमी) शामिल हैं।

2,121 गांवों को मिलेगा बेहतर रेल कनेक्शन

सरकार के मुताबिक, इन क्षमता बढ़ाने वाली परियोजनाओं का फायदा करीब 2,121 गांवों को मिलेगा। इन गांवों की कुल आबादी लगभग 52 लाख है। नई और एक्स्ट्रा रेल लाइनों से ट्रेनों की आवाजाही के लिए ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी और व्यस्त रूटों पर ट्रैफिक का दबाव कम करने में मदद मिलेगी।

47 MTPA तक बढ़ सकती है माल ढुलाई

इन परियोजनाओं का फायदा सिर्फ यात्रियों तक सीमित नहीं रहेगा। रेलवे के मुताबिक, क्षमता बढ़ने के बाद करीब 47 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता पैदा हो सकती है। इससे कोयला, खनिज, औद्योगिक सामान और दूसरे माल की आवाजाही तेज हो सकती है। साथ ही कई प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को भी बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।

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