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Gold: अभी न खरीदा सोना तो होगा घाटा! 2022 में कीमत 55,000 के पार पहुंचने का अनुमान

 Edited By: India TV Paisa Desk
 Published : Dec 30, 2021 05:00 pm IST,  Updated : Dec 30, 2021 05:00 pm IST

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान सोने ने खूब रफ्तार पकड़ी थी और यह 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव तक पहुंच गया था।

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Gold: अभी न खरीदा सोना तो होगा घाटा! 2022 में कीमत 55,000 के पार पहुंचने का अनुमान

Highlights

  • सोना एक बार फिर 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच सकता है
  • कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान सोने ने खूब रफ्तार पकड़ी
  • शेयर बाजारों में जारी तेजी के बीच सोने को लेकर निवेशकों का आकर्षण कम हो गया

मुंबई। गुजरते साल की दूसरी छमाही में भले ही सोने की चमक थोड़ी फीकी पड़ी हो लेकिन आने वाले साल में इसके अपनी खोई चमक फिर से हासिल कर लेने की उम्मीद है। महामारी एवं मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं के बीच सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना एक बार फिर 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच सकता है। 

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी की पहली लहर के दौरान सोने ने खूब रफ्तार पकड़ी थी और यह 56,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव तक पहुंच गया था। लेकिन वर्ष 2021 इसके लिए उतना अच्छा साल नहीं साबित हुआ। शेयर बाजारों में जारी तेजी के बीच सोने को लेकर निवेशकों का आकर्षण कम हो गया। इसी वजह से सोना इस समय करीब 48,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर कारोबार कर रहा है। यह भाव सोने के सर्वकालिक उच्च स्तर से करीब 14 प्रतिशत कम है और जनवरी 2021 की तुलना में भी चार प्रतिशत नीचे है। 

इस गिरावट के बावजूद सोने का मौजूदा स्तर भी कुल अंतरराष्ट्रीय कीमतों की तुलना में तीन प्रतिशत अधिक है जिसके लिए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती कीमत जिम्मेदार है। 

कॉमट्रेंड्ज के सह-संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ज्ञानशेखर त्यागराजन सोने का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहने के लिए इक्विटी बाजारों में मौजूद तेजी को वजह मानते हैं। उन्होंने कहा, "इसके साथ ही क्रिसमस एवं नव-वर्ष की छुट्टियों के आसपास कोविड संक्रमण बढ़ने की आशंका से लगाई गई पाबंदियां यूरोप के कई देशों में नजर आ रही हैं। अमेरिका ने भी अपने नागरिकों से घूमने-फिरने को लेकर काफी एहतियात बरतने की अपील की है।" 

त्यागराजन ने कहा कि नीतिगत दरों को कम करने से अमेरिकी डॉलर यूरो एवं येन की तुलना में अधिक आकर्षक साबित हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर बाजार में सोना 1,791 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर था जबकि भारत में एमसीएक्स सोना वायदा 29 दिसंबर को 47,740 रुपये प्रति 10 ग्राम के भाव पर रहा। त्यागराजन का मानना है कि सोने के भाव मध्यम अवधि में बढ़ने की उम्मीद है। 

मुद्रास्फीति से जुड़ी चिंताओं के अलावा कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन को लेकर पैदा हुई अनिश्चितताएं भी इस तेजी को बल दे सकती हैं। उन्होंने कहा, "शेयर बाजारों में गिरावट का रुख रहने और महंगाई से मुकाबले के एक साधन के तौर पर सोने को मुफीद मानने की सोच के नाते इसे अच्छा समर्थन मिलेगा। अगर कोई भू-राजनीतिक तनाव आता है तो इसे और भी मजबूती मिल जाएगी।" 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2022 की पहली छमाही में सोने के 1700-1900 डॉलर प्रति औंस के दायरे में रहने की उम्मीद है और दूसरी छमाही में यह 2,000 डॉलर प्रति औंस के स्तर को भी पार कर सकता है। वहीं भारत में सोने के पहली छमाही में 45,000-50,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के दायरे में रहने और दूसरी छमाही में 55,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का स्तर पार कर जाने की उम्मीद है। 

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के वरिष्ठ विश्लेषक (कमोडिटी) तपन पटेल ने कहा कि अमेरिका के मुद्रास्फीति आंकड़े और बांड प्रतिफल की स्थिति भी सोने को तेज कर सकती है। उन्होंने कहा कि दीर्घावधि में सोने को 1970 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर समर्थन मिलने की उम्मीद है। भारत के लिए यह आंकड़ा 51,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह सकता है। 

विश्व स्वर्ण परिषद के क्षेत्रीय सीईओ (भारत) सोमसुंदरम पी आर का मानना है कि भारत ने हॉलमार्किंग को अनिवार्य किए जाने से कारोबार पर संभावित असर को काफी कम कर दिया। अभी तक 1.27 लाख आभूषण कारोबारी हॉलमार्क वाले आभूषण बेचने के लिए बीआईएस में पंजीकरण करा चुके हैं।

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