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Retail Inflation: मानसून में महंगाई की बारिश, 4.81% के साथ जून में मुद्रास्फीति की दर 3 महीने की ऊंचाई पर

Written By: Sachin Chaturvedi @sachinbakul Published : Jul 12, 2023 07:36 pm IST, Updated : Jul 12, 2023 08:20 pm IST

जून में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़ने के बावजूद यह भारतीय रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के नीचे है।

Inflation- India TV Paisa
Photo:FILE Inflation

बारिश के मौसम ने भले ही आपको गर्मी से राहत दी हो, लेकिन जून महीने की बारिश ने आपके घर का बजट जरूर बिगाड़ दिया है। जून महीने में महंगाई (Retail Inflation) में जबर्दस्त उछाल आया है। बारिश के बीच सब्जियों, मसालों और अन्य खाद्य उत्पादों की कीमतें बढ़ने से जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीनों के उच्चस्तर 4.81 प्रतिशत पर पहुंच गई। महंगाई मई में 4.25% पर आ गई थी । जून में अनाज की कीमतें 12.7% बढ़ीं। दूध और दूध उत्पादों में महंगाई 8.56% थी। दालों की महंगाई 10.53% थी जबकि कपड़े और जूते की महंगाई 6.19% थी।

ताजा आंकड़ों के अनुसार शहरों में गांव से ज्यादा महंगाई रिकॉर्ड की गई। शहरी महंगाई दर जून में बढ़कर 4.96% पर पहुंच गई। वहीं ग्रामीण महंगाई दर बढ़कर 4.72% (MoM) रही। 

Inflation
Image Source : FILEInflation

अप्रैल के बाद सबसे तेज महंगाई 

सरकार ने बुधवार को उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति के आंकड़े जारी किए। मई में खुदरा मुद्रास्फीति 4.31 प्रतिशत रही थी जबकि साल भर पहले जून, 2022 में यह सात प्रतिशत थी। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जून में खाद्य उत्पादों की मुद्रास्फीति 4.49 प्रतिशत रही जबकि मई में यह 2.96 प्रतिशत थी। सीपीआई में खाद्य उत्पादों का भारांक लगभग आधा होता है। 

मानसून में महंगाई की बारिश
Image Source : FILEमानसून में महंगाई की बारिश

रिजर्व बैंक की सहनीय सीमा के भीतर है महंगाई 

जून में खुदरा मुद्रास्फीति की दर बढ़ने के बावजूद यह भारतीय रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर के नीचे है। सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा मुद्रास्फीति को दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत तक सीमित रखने का दायित्व सौंपा हुआ है। रिजर्व बैंक खुदरा मुद्रास्फीति के आंकड़े को ध्यान में रखते हुए द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा करता है। 

फिर बढ़ सकती है ब्याज दर 

रिजर्व बैंक ने पिछले महीने की मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत दर रेपो को 6.5 प्रतिशत पर कायम रखा था। इसके साथ ही उसने अप्रैल-जून तिमाही में खुदरा मुद्रास्फीति के 4.6 प्रतिशत पर रहने का अनुमान जताया था। अब महंगाई बढ़ने के साथ ही एक बार फिर ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी का डर सताने लगा है। 

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